Biodata Maker

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

मध्यप्रदेश के कुख्यात 'डेथ ट्रैक' पर ट्रेन की चपेट में आया बाघ, वन विभाग ट्रेन जब्त करने पर अड़ा

Advertiesment
हमें फॉलो करें death track

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 (16:42 IST)
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित रातापानी टाइगर रिजर्व में एक और दर्दनाक हादसा हो गया। मंगलवार रात को बुधनी-मिडघाट रेलवे ट्रैक पर तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से एक वयस्क नर बाघ की मौत हो गई।
बाघ शिकार के पीछे दौड़ते हुए ट्रेन से टकराया और इंजन में फंसकर करीब 25 फीट तक घसीटा गया। यह घटना रिजर्व के ओबेदुल्लागंज रेंज के अंतर्गत हुई, जो जिला मुख्यालय से लगभग 95 किलोमीटर दूर है।

ट्रेन ने बाघ को कुचल दिया : वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा ट्रेन नंबर 01410 (विशेष ट्रेन) से हुआ। बाघ के जोरदार दहाड़ने की आवाज सुनकर रेलवे कर्मचारियों ने वन विभाग को सूचना दी। मृतक बाघ का शव बुधवार देर शाम मिला, जिसे रिजर्व के अधीक्षक मयंक राज और डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार की टीम ने बरामद किया। मुख्य वन संरक्षक अशोक कुमार की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बाघ शिकार पकड़ने की कोशिश में ट्रैक पर था, जब ट्रेन ने उसे कुचल दिया।

एक हफ्ते में दूसरी मौत : यह घटना पिछले एक सप्ताह में रिजर्व में बाघों की दूसरी मौत है और पिछले एक वर्ष में पांचवीं। वन विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए रेलवे पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। विभाग का कहना है कि बुधनी-मिडघाट ट्रैक को 'डेथ ट्रैक' कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां पिछले एक दशक में 10 बाघ, 15 तेंदुए, दो भालू और अन्य वन्यजीवों की ट्रेन दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है। विभाग ने रेलवे को बार-बार चेतावनी दी थी कि बाघ कॉरिडोर वाले इस इलाके में रात के समय ट्रेनों की गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया।

वन विभाग ने कहा, ट्रेन जब्त करेंगे : वन अधिकारियों ने असम का उदाहरण देते हुए ट्रेन के इंजन को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। असम में 2020 में एक ट्रेन ने हाथी और उसके बछड़े को कुचल दिया था, जिसके बाद वन विभाग ने इंजन जब्त कर लिया था। मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों का कहना है कि अगर असम हाथियों के लिए ऐसा कर सकता है, तो हम बाघों के लिए क्यों नहीं? यह लापरवाही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन है। विभाग ने रेलवे को पत्र लिखकर स्पीड कंट्रोल, चेन-लिंक फेंसिंग, अंडरपास/ओवरपास निर्माण और इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाने की मांग दोहराई है। जुलाई 2024 में इसी ट्रैक पर तीन बाघ शावकों की मौत के बाद भी ऐसी ही मांग उठी थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा।

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेलवे की उदासीनता से बाघों का संरक्षण खतरे में है। वन विभाग को लोको पायलट के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना चाहिए। RTI से भी खुलासा हुआ है कि 2015 से 2024 तक इस ट्रैक पर पांच बाघ और 14 तेंदुए मारे गए, लेकिन रेलवे ने सुझावों को नजरअंदाज किया। मध्य प्रदेश देश का 'टाइगर स्टेट' है, जहां 2022 की जनगणना के अनुसार 785 बाघ हैं। रातापानी रिजर्व सहित कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा, पेंच और पन्ना जैसे अभयारण्यों में बाघों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन विकास परियोजनाओं जैसे रेल ट्रैक वन्यजीवों के लिए खतरा बन रही हैं। वन विभाग ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि ऐसी त्रासदियां रुक सकें।
Edited By: Navin Rangiyal

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

2027 में 2 चरणों में शुरू होगी जनगणना, केंद्रीय कैबिनेट ने लगाई मुहर, 11718 करोड़ का बजट पारित