Publish Date: Mon, 30 Mar 2026 (16:16 IST)
Updated Date: Mon, 30 Mar 2026 (16:31 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब मोहन सरकार ने राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरु कर दिया है। रविवार को प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की पहली सूची जारी कर दी गई। सरकार के गठन के करीब ढाई साल बाद जारी एल्डरमैन की सूची में 750 से अधिक कार्यकर्ताओं के नाम है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सूची में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों के नाम नदारद है। ग्वालियर में केवल डबरा नगरपालिका के एल्डरमैनों का नाम सूची में नजर आया।
लंबे इंतजार के बाद जारी हुई एल्डरमैन की सूची में बड़े शहरों के नाम न होना इस बात का संकेत है कि यहां के नामों को लेकर दिग्गज नेताओं के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाई। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इन शहरों में नामों का एलान न होना सत्ता और संगठन के भीतर चल रही जबरदस्त गुटबाजी को दर्शाता है।
गुटबाजी ने फंसाया पेंच-रविवार को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश में 25 जिलों की 123 नगर परिषदों और 46 नगर पालिकाओं के लिए 768 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। वहीं भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों के साथ-साथ ग्वालियर और शिवपुरी की सूचियों को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन क्षेत्रों में स्थानीय क्षत्रपों और संगठन के बीच नामों को लेकर एक राय नहीं बन पाई है।
दिग्गजों की दावेदारी- राजनीतिक विश्लेषक बताते है कि जिले की राजनीति में एल्डरमैन के पद का काफी महत्व होता है। एल्डरमैन के पास परिषद की बैठकों में वोट डालने का अधिकार तो नहीं होता, लेकिन वे चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और विकास कार्यों के लिए बजट पर प्रभाव डाल सकते हैं। यहीं कारण है कि एल्डरमैन के लिए जिले के कार्यकर्ता अपने नेताओं के जरिए जोरअजमाइश करते है। एल्डरमैन के लिए संगठन के ओर से नाम सरकार को भेजे जाते है। रविवार को सूची जारी होने से पहले शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच मैराथन बैठक हुए और इसी बैठक में नामों पर अंतिम मुहर लगाई गई।
राजधानी भोपाल के साथ इंदौर और ग्वालियर में एल्डरमैन के नामों पर दिग्गज नेताओं के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के लिए कारण नाम होल्ड कर लिए गए। भोपाल और इंदौर में कई बड़े नेताओं के अपने-अपने समर्थक हैं, जिन्हें वे एल्डरमैन के तौर पर एडजस्ट करवाना चाहते हैं। पिछले दिनों भोपाल में भाजपा की जिला कार्यकारिणी के नामों को लेकर जिस तरह से बड़े नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन और नाराजगी देखने को मिली, उससे अब एल्डरमैन के नामों पर सरकार और संगठन फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहा है।
ग्वालियर-चंबल की सूची पर भारी गुटबाजी- ग्वालियर चंबल अंचल में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों और भाजपा के पुराने मूल कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बिठाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है और यहीं कारण है कि एल्डरमैन के नामों का एलान नहीं हो पाया। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद ग्वालिल-चंबल में भाजपा दो गुटों में बंट गई है। नई और पुरानी भाजपा के आमने-सामने होने की खबरें लगातार आती रहती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि एल्डरमैन जैसी नियुक्तियों में उन्हें प्राथमिकता मिलेगी ताकि वे नगर निगमों में अपना प्रभाव बनाए रख सकें।
वहीं मूल भाजपा के पुराने दिग्गज नेता और कार्यकर्ता, जो दशकों से भाजपा का झंडा उठाए हुए हैं, वे बाहरी यानि सिंधिया समर्थकों को तरजीह दिए जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। शिवपुरी और ग्वालियर जैसे शहरों में यह खींचतान सबसे ज्यादा है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल की सूची इसलिए जारी नहीं हो पाई क्योंकि एल्डरमैन की रायशुमारी के दौरान हर बड़े नेता ने अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ा दिए। यदि एक गुट के नाम फाइनल होते, तो दूसरे गुट की नाराजगी का डर था। यही कारण है कि डैमेज कंट्रोल के लिए फिलहाल इन बड़े शहरों के नामों का एलान रोक दिया गया है।
ग्वालियर नगर निगम में जहाँ महापौर कांग्रेस की है, वहाँ भाजपा चाहती है कि उसके एल्डरमैन इतने मजबूत हो निगम की बैठकों में विपक्षी घेराबंदी कर सकें। पिछले दिनों जिस तरह से कैप्टन रुप सिंह स्टेडियम को MPCA को लीज पर दिए जाने को लेकर भाजपा पार्षद दल ही दो गुटों में बंटा हुआ दिखाई दिया, उससे चुनौतियां और बढ़ गई है।
निकाय चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा-एल्डरमैन की नियुक्ति केवल पद भरना नहीं, बल्कि 2027 के निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की रणनीति है। ऐसे में जब विधानसभा चुनाव से पहले 2027 में होने वाले निकाय चुनाव को एक तरह से सेमीफाइनल मुकाबले के तौर पर देखा जाता है, तो उसकी तैयारी में पार्टी अभी से जुट गई है। पिछले बार निकाय चुनावों में जिस तरह से भाजपा को ग्वालियर, सिंगरौली से जैसे बड़े नगर निगम में हार का सामना करना पड़ा था, उसको देखते हुए सरकार और संगठन के सामने पार्टी को एकजुट करने की चुनौती है।
वहीं पार्टी से जुडे सूत्र बताते है कि रुकी हुई सूचियों पर मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मंथन जारी है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व स्थानीय स्तर पर दिग्गज नेताओं के बीच सहमित बनाने में जुटा है और ऐसे इस बात की उम्मीद है कि जल्द इस पर आपसी सहमति बनाकर शेष बची हुई सूचियां जारी कर दी जाएगी।