मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस को एक बार फिर आम जनमानस में अपनी छवि और धारणा को बदलने के लिए काम करने की नसीहतत दी है। गुरुवार को भोपाल में पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक-महा निरीक्षक सम्मेलन वर्ष 2025 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीनियर पुलिस अफसर अपने प्रभार के क्षेत्रों में औचक निरीक्षण जैसी गतिविधियां को तत्काल आरंभ करें।
जनता के बीच छवि सुधारे पुलिस-इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुलिस के बारे में जनसामान्य की धारणा बदलने और पुलिस के जनता से बेहतर संवाद के लिए विशेष पहल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी उपलब्धियों और सकारात्मक गतिविधियों के संबंध में जनप्रतिनिधियों और जनसामन्य से जानकारियां साझा करें। पुलिस अधिकारी बेहतर संवाद के लिए मीडिया के माध्यम से सक्रिय रहें। पुलिस की छवि मदद करने वाली हो, हमारा प्रयास हो कि लोग पुलिस को भय नहीं विश्वास की नजरों से देखें। पुलिस से अपराधियों में भय हो लेकिन आमजन में भरोसे और सुरक्षा की भावना विकसित हो। इस विश्वास को बनाये रखना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया पर रखे निगाह-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान युग में सोशल मीडिया अत्यंत शक्तिशाली साधन होने के साथ-साथ गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसके दुरुपयोग से अफवाह, अपराध और भ्रम फैलाने की संभवनाएं भी बढ़ी हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम सोशल मीडिया की शक्ति का सकारात्मक और रचनात्मक सामग्री के उपयोग करें। किसी भी भ्रामक या उकसाऊ सामग्री को समय रहते पहनाकर उस पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करना आज की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए पुलिस को जागरूकता और तकनीक दोनों पर कार्य करना होगा। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ब्लैक स्पॉट की पहचान कर विशेष रणनीति बनाई जाए। संवेदनशील मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग, गति नियंत्रण, शराब पीकर वाहन चलाने पर सख्त निगरानी तथा यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घालय व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वालों के लिए लागू राहवीर योजना की जानकारी का विस्तार करने की आश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सुरक्षा राज्य सरकार और पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिन क्षेत्रों में महिलाओं के विरूद्ध अपराधों की संभावना अधिक रहती है वहां विशेष निगरानी, नियमित गश्त और त्वरित कार्यवाही की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में नशे के विरुद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से ही धार्मिक शहरों में शराब बंदी लागू की गई है। इन शहरों में अन्य तरीकों से शराब बेचने वालों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। शराब के अलावा दवा या अन्य रासायनिक पदार्थों के नशे की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बरदाश्त नहीं किया जाएगा।