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दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मिले CM डॉ. मोहन यादव, कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज

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Chief Minister Dr. Mohan Yadav met Home Minister Amit Shah in Delhi
मध्यप्रदेश में निगम मंडलों में नियुक्तियों के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की अटकले तेज हो गई है। गुरुवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की अटकलों को और बल मिल गया। प्रदेश में मोहन सरकार जब अपना ढ़ाई साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है, तब भाजपा संगठन और सरकार के भीतर लंबे समय से चल रही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं को इस मुलाकात ने नया बल दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि जल्द ही मोहन सरकार के मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ निगम मंडलों के शेष पदों पर भी नियु्क्थियों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की चर्चा हुई। सरकार के ढ़ाई साल पूरे होने पर मंत्रियों का  उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर मूल्याकंन कर उन पर  निर्णय लेने को लेकर पार्टी हाईकामन ने हरी झंडी दे दी है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट में नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर रहा है।
 
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने सरकार को फटकार लगाने के बाद अब इस मामले पर जल्द अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में विजय शाह की छुट्टी की जा सकती है। वहीं कैबिनेट में शामिल सीनियर मंत्रियों के साथ पहली बार राज्य मंत्री के पद से नवाजे गए मंत्रियों के परफॉर्मेंस को लेकर भी सवाल उठ रहे है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय मंत्रियों की परफॉर्मेंस के साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरण के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव दिख सकता है।
 
ऐसे में मध्यप्रदेश में अब जल्द मोहन सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता  है, जो केवल नए मंत्रियों की एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी तय है। मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं, उनमें कई नए और युवा चेहरे शामिल हैं। पार्टी ओबीसी, आदिवासी और विंध्य-महाकौशल क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर सकती है। 
 

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