Black paint smeared on Vijay Shahs bungalow in Bhopal: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी आहत करने वाले मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार के मंत्री विजय शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके विरोध में भोपाल में युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित खत्री के नेतृत्व में युवाओं ने मंत्री की नेम प्लेट पर कालिख पोतकर प्रदर्शन किया।
शाह को लेकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
उल्लेखनीय है कि कर्नल सोफिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में 19 जनवरी 2026 को हुई ताजा सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने विजय शाह के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया है। विजय शाह के वकील ने जब कोर्ट में दलील दी कि मंत्री ने अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं, तो चीफ जस्टिस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा- अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। हमने पहले भी उनके द्वारा दी गई माफी की प्रकृति पर टिप्पणी की थी। अब इसका कोई महत्व नहीं रह जाता। इससे पहले जुलाई 2025 में भी कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि विशेष जांच दल (SIT) ने अगस्त 2025 में ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की मंजूरी पर फैसला ले।
क्या था शाह का विवादित बयान?
विजय शाह ने यह विवादित बयान 11-12 मई 2025 को इंदौर के पास रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिया था। उन्होंने कर्नल सोफिया को "आतंकवादियों की बहन" कहकर संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि आतंकियों से बदला लेने के लिए सरकार ने "उन्हीं (आतंकियों) के समुदाय की एक बहन" को सेना के विमान में भेजा ताकि उन्हें सबक सिखाया जा सके। शाह के इस बयान को सांप्रदायिक और लैंगिक (gendered) आधार पर अपमानजनक माना गया, क्योंकि उन्होंने एक गौरवशाली सैन्य अधिकारी की पहचान को उनके धर्म और लिंग से जोड़कर नीचा दिखाने की कोशिश की।