भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में लगातार बढ़ते मौत के आंकड़ों के बाद अब कांग्रेस ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरना शुरु कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सीटिंग जज से जांच से कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी घेरा है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभारी मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछ रहा कि हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और वो महज़ मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? कुछ ट्रांसफ़र और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं धुलता।
सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह ने लिखा कि इंदौर मेरे बचपन का शहर, मेरे राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी मे इसकी गिनती होती है और उसी इंदौर शहर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। आँकड़ा जब तक २/४ मौत का रहा किसी ने साँस नहीं ली लेकिन मौतों की गिनती बढ़ने लगी तो ज़िम्मेदारी की टोपी सब दूसरे को पहनाना शुरू कर दिए। मंत्री अफ़सर को, अफ़सर मेयर को, मेयर व्यवस्था को और व्यवस्था.. घंटा की लड़ाई पर उलझ गयी। प्रभारी मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछ रहा कि हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और वो महज़ मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? कुछ ट्रांसफ़र और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं धुलता। मैं इस हादसे की न्यायिक जांच की माँग करता हूँ। पब्लिक के सामने सुनवाई हो और हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच करायी जाए। मौत के मुआवजे से ज़िन्दगी नहीं लौटती। ग़लतियों पर पर्दा डालने की बजाय ग़लतियों की ज़िम्मेदारी तय हो और उन्हें दण्डित किया जाए।
इंदौर कलेक्टर को जीतू की चेतावनी- वहीं इंदौर कलेक्टर औऱ महापौर के RSS कार्यालय जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सीधे चेताववी देते हुए कहा कि कलेक्टर ने बताया दिया है कि वह भाजपा के कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे है। अगर राजनीतिक दलों के के कार्यालय पर डूयूटी करने वाली शैली को कांग्रेस का कार्यकर्ता ठीक कर देगा। जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसा कलेक्टर नहीं चाहिए जो भाजपा दफ्तर के ऑफिर में जाकर हाजिरी लगाए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को RSS कार्यालय और भाजपा कार्यालय जाना शोभा नहीं देता।
इसके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर के लोगों के लिए एक चिट्ठी भी लिखी है जिसमें उन्हंने कहा कि जहरीले पानी की वजह से आज इंदौर को शर्मिंदा होने पड़ा है। वहीं उन्होंने इसे इंदौर की गौरवशाली पहचान के लिए कलंक बताया है।