हर दिन ध्यान का संकल्प, ध्यान दिवस पर सैकड़ों ने लिया नियमित ध्यान का प्रण
महाकाल गुरुकुल आश्रम से पुलिसकर्मियों व निर्माण श्रमिकों तक पहुंचा ध्यान का संदेश
International Meditation Day: 21 दिसंबर को जब पूरा अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस मना रहा था, उसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु कृष्णा गुरुजी ने ध्यान दिवस के अवसर पर ध्यान सत्रों की एक विशेष मैराथन आयोजित कर समाज के विविध वर्गों तक ध्यान का संदेश पहुँचाया। इस पहल के अंतर्गत सैकड़ों प्रतिभागियों ने प्रतिदिन ध्यान करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत शनि नवग्रह स्थित गुरुकुल से हुई, जहां 111 बटुक ब्राह्मणों को ध्यान का अभ्यास कराया गया। इसके बाद महाकाल गुरुकुल के 100 बटुक ब्राह्मणों तथा पुलिस लाइन निर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों और पुलिस कर्मियों को भी ध्यान सत्रों से जोड़ा गया।
कृष्णा गुरुजी ने कहा कि योग का प्रमुख अंग ध्यान आज विश्वभर में स्वीकार किया जा रहा है। यह सनातन परंपरा की शक्ति को रेखांकित करता है और भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा में बढ़ते कदमों का संदेश देता है। उन्होंने प्रत्येक सत्र में सरल शब्दों में ध्यान की अवधारणा समझाते हुए कहा कि 'मेडिटेशन हमारा स्वभाव है।' बचपन के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब माता-पिता कहते हैं— ध्यान से चलो, ध्यान से पढ़ो—तो वह भी ध्यान का ही रूप है, जिसे बाहरी ध्यान (आउटर मेडिटेशन) कहा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज विश्व आंतरिक ध्यान (इनर मेडिटेशन) का अभ्यास कर रहा है, जिसमें आँखें बंद कर स्वयं को खुला छोड़ दिया जाता है और सहज ध्यानावस्था में प्रवेश किया जाता है। ध्यान मन, बुद्धि और आत्मा का विश्राम है। पहले शरीर को स्थिर किया जाता है, फिर श्वास-प्रश्वास को प्राणायाम से संतुलित कर ध्यान में प्रविष्ट होते हैं—जो अंततः सत्-चित्-आनंद की अनुभूति तक ले जाता है।
कार्यक्रम में भजन-गायन के माध्यम से भी ध्यान का अनुभव कराया गया। 'मुझको कहां ढूंढे रे बंदे' जैसे भजनों के साथ नारायण-नारायण के सामूहिक गान ने प्रतिभागियों को सहज रूप से ध्यानावस्था में पहुंचाया। कृष्णा गुरुजी ने स्पष्ट किया कि ध्यान कोई धर्म नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा के बोध तक पहुंचाने की की विधि है।
पुलिस निर्माण क्षेत्र में कार्यरत एक श्रमिक के प्रश्न—'ध्यान क्या है?' —का उत्तर देते हुए गुरुजी ने कहा कि प्रार्थना में हम भगवान से कहते हैं—भगवान सुनते हैं; ध्यान में हम सुनते हैं—भगवान क्या कहते हैं। दोनों गुरुकुल में कृष्णा गुरुजी द्वारा लिखित कलियुग पुराण ग्रंथ भेंट किया गया। कार्यक्रम में महाकाल गुरुकुल के प्राचार्य सोम गुरुजी नागर, पुलिस निर्माण विभाग के अधिकारी राजेन्द्र शर्मा, कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अनिल कुमार पिंकू नागर, उज्जैन के राकेश बजाज सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।