मध्य प्रदेश में बच्चों को अपनों से ही खतरा, 95 फीसदी यौन अपराधों में आरोपी पहले से परिचित
हर वर्ष 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी पीड़ित को पहले से जानता था:एनसीआरबी
भोपाल। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट के पाँच वर्षों का विश्लेषण बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर पेश करती है। विश्लेषण के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में पोकसो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत दर्ज मामलों में हर वर्ष 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी पीड़ित को पहले से जानता था। एनसीआरबी की नवीनतम रिपोर्ट, जो वर्ष 2023 के आँकड़े प्रस्तुत करती है, के अनुसार ज्ञात आरोपी से जुड़े मामलों का प्रतिशत 97 प्रतिशत है।
विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2023 में,पोकसो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत दर्ज 3,866 मामलों में से 3,756 मामलों में आरोपी पीड़ित को जानता था। इसी तरह, पिछले वर्षों में भी यही रुझान दिखा, 2022 में 99.2 प्रतिशत, 2021 में 99.1 प्रतिशत, 2020 में 97.9 प्रतिशत और 2019 में 96.9 प्रतिशत मामलों में आरोपी परिचित था। यह प्रतिशत केवल धारा 4 और 6 के मामलों पर आधारित है, क्योंकि (एनसीआरबी) इन्हीं धाराओं के तहत आरोपी के ज्ञात और अज्ञात होने का मानकीकृत और तुलनात्मक डेटा उपलब्ध कराता है।
चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा के अनुसार यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार और समुदाय स्तर पर निवारक उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाती है। “यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि परिवार और बच्चे यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहे हैं, भले ही आरोपी परिवार का सदस्य, रिश्तेदार या कोई भरोसेमंद व्यक्ति ही क्यों न हो"।
सोहा मोइत्रा के मुताबिक यह रिपोर्टिंग तंत्रों के प्रति बढ़ती जागरूकता और भरोसे को दर्शाता है, लेकिन साथ ही समुदाय आधारित संरक्षण प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। क्राई का कार्य सतर्क स्थानीय नेटवर्क जैसे ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियाँ को सशक्त करने और माता- पिता व देखभालकर्ताओं को जोड़ने पर केंद्रित है,ताकि जोखिमों की पहचान समय रहते हो सके और नुकसान होने से पहले ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्राई के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2023 में, 239 मामले परिवार के सदस्यों से जुड़े थे, जबकि 1,267 मामलों में परिवार के मित्र, पड़ोसी, नियोक्ता या अन्य परिचित वयस्क शामिल थे। सबसे बड़ा हिस्सा- 2,250 मामले, मित्रों, ऑनलाइन परिचितों और लिव-इन पार्टनर्स से संबंधित था। पिछले पाँच वर्षों के एनसीआरबी आँकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि यह पैटर्न लगातार बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि बच्चों के लिए जोखिम अजनबियों की तुलना में उनके करीबी लोगों और सहकर्मी परिवेश में अधिक केंद्रित है।
16–18 वर्ष की लड़कियाँ यौन शोषण के प्रति सबसे अधिक असुरक्षित-एनसीआरबी 2023 के आँकड़ों के अनुसार 16 से 18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियाँ यौन शोषण की सबसे अधिक शिकार हुई है। इस श्रेणी में 2,018 पीड़ितों में से 2,003 लड़कियाँ थीं, जो 99.26 प्रतिशत है। आँकड़े यह भी दर्शाते हैं कि कम उम्र के बच्चों में, छह वर्ष से कम आयु के सभी 62 पीड़ित और 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के सभी 246 पीड़ित लड़कियाँ थीं। 12 से 16 वर्ष के आयु वर्ग में, 1,567 में से 1,565 पीड़ित लड़कियाँ थीं (99.87 प्रतिशत)। कुल मिलाकर, 2023 में पोकसों के तहत दर्ज 3,893 बाल पीड़ितों में से 3,876 लड़कियाँ थीं, जो 99.56 प्रतिशत है।
मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में 8.92 प्रतिशत की वृद्धि-मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध 2022 के 6,007 मामलों से बढ़कर 2023 में 6,543 हो गए, जो एक वर्ष में 8.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा पोकसों तथा संबंधित आईपीसी धाराओं के तहत दर्ज मामलों से आया, जिनमें 8.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जहाँ बलात्कार और तस्करी जैसी कुछ श्रेणियों में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, वहीं यौन हिंसा के अन्य रूपों में तेज़ वृद्धि देखी गई। बलात्कार के प्रयास के मामले 3 से बढ़कर 15 हो गए, और नाबालिगों को वेश्यावृत्ति के लिए बेचने से जुड़े मामले 1 से बढ़कर 2 हो गए। इन्सल्ट टू मौडेस्टि के मामलों में भी 5 से बढ़कर 6 की वृद्धि हुई।
डिजिटल और सहकर्मी परिवेश में बढ़ते जोखिम-हालाँकि एनसीआरबी आँकड़े उन मामलों को अलग से वर्गीकृत नहीं करते जहाँ ऑनलाइन संपर्क सीधे तौर पर शोषण का कारण बने हों, लेकिन मित्रों, ऑनलाइन परिचितों और लिव-इन पार्टनर्स की श्रेणी में पिछले पाँच वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है।
सोहा मोइत्रा के मुताबिक “इस श्रेणी के मामले 2019 में 1,407 से बढ़कर 2020 में 1,855 हुए, 2021 में 1,648 के स्तर पर बने रहे और 2022 में आगे बढ़कर 2,005 हो गए। यह रुझान, किशोरों में बढ़ते इंटरनेट उपयोग के साथ मिलकर, डिजिटल और सहकर्मी परिवेश में उभरते जोखिमों को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करता है। यह माता-पिता की अधिक सतर्कता, बच्चों के साथ ऑनलाइन संपर्कों पर नियमित संवाद और बदलते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढाँचों की आवश्यकता को रेखांकित करता है,”
वर्ष 2023 में मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ दर्ज कुल अपराधों में 29.22 प्रतिशत यौन अपराध थे, जो वर्ष 2022 के रुझान के अनुरूप है। यह दर्शाता है कि कुल अपराधों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध लगातार एक बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।
दो दशकों से अधिक समय से मध्य प्रदेश में कार्यरत एक बाल अधिकार संगठन के रूप में, क्राई इस बात पर ज़ोर देता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए समुदाय की साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। बच्चों के साथ प्रारंभिक संवाद, उनके व्यवहार में बदलावों पर ध्यान और समय पर हस्तक्षेप ये सभी नुकसान को रोकने के लिए निर्णायक हैं।
मोईत्रा कहती हैं “ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियाँ , महिला एवं बाल संरक्षण सेवाएँ, तथा पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों की भूमिका सहित स्थानीय बाल संरक्षण तंत्रों को सुदृढ़ और सक्रिय करना, एक प्रभावी सुरक्षा तंत्र बनाने के लिए अनिवार्य है, जो जोखिमों की समय रहते पहचान कर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सके,”।