मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर के शिप्रा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा सह 251 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों में पाणिग्रहण संस्कार का विशेष महत्व है। यह संस्कार ही परिवार परंपरा की निरंतरता का आधार बनता है। पाणिग्रहण संस्कार का संतों के सानिध्य और सामूहिक विवाह के आनंद के साथ संपन्न होना विशेष संयोग और सौभाग्य का प्रतीक है। सामूहिक विवाह समारोह सामाजिक विभेद और फिजूल खर्ची जैसी बुराइयों की जगह सामाजिक समरसता और मितव्यता का संदेश देने के प्रभावी माध्यम हैं। समाज में सभी को ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने में अपना योगदान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने डॉक्टर बेटे का विवाह सामूहिक विवाह समारोह में ही किया। बिना ऊंच-नीच और जातपात के भेद के बिना होने वाले सामुहिक विवाह समारोहों का आनंद अद्भुत है। उन्होंने कहा कि हम विवाह और मृत्यु भोज जैसे आयोजनों में फिजूल खर्ची को रोककर अपनी बचत और संसाधनों का उपयोग बच्चों को पढ़ाने लिखाने और परिवार की बेहतरी में करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी उपस्थित जनसमुदाय को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर जिले के शिप्रा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा सह 251 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प वर्षा कर नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा उनके उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करते हुए ईश्वर से नव विवाहितों को वैभव, यश, कीर्ति, और आनंद प्रदान करने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव विवाहित जोड़ों से माता-पिता की सेवा करने और समाज के कल्याण में योगदान देने का आवाहन भी किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, भाजपा अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल तथा श्री हितानंद शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।