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मध्यप्रदेश में SIR पर सियासी महाभारत,अनमैप्ड और वोटर्स को शिफ्ट करने पर सवाल, कांग्रेस बोलीं, वोट चोरी का षड्यंत्र

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विकास सिंह

, बुधवार, 24 दिसंबर 2025 (13:37 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में SIR की प्रकिया में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6,143 वोटर्स में सें 42 लाख से अधिक वोटर्स के नाम कट गए है। चुनाव आयोग के द्वारा जारी प्रारूप मतदाता सूची में प्रदेश में वर्तमान में 5 करोड 31 लाख 31 हजार 983 से अधिक मतदाता है। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में में करीब 8 लाख 40 हजार ऐसे मतदाता ऐसे है जिनकी मैपिंग नहीं हुई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा के मुताबिक मध्यप्रदेश में 42 लाख 74 हजार 160 वोटर्स के नाम कट गए है। इनमें 19.19 लाख पुरूष और 23.64 लाख महिला वोटर्स शामिल है।

अनमैप्ड वोटर्स पर सियासत-मध्यप्रदेश में SIR की प्रक्रिया में 8 लाख से अधिक मतदाता है जिनकी मैंपिग नहीं हो पाई है, यानि ऐसे वोटर्स SIR प्रक्रिया के दौरान 2003 की वोटर लिस्ट में अपने माता-पिता का लिंक प्रस्तुत नहीं पाए। नो मैंपिंग वाले वोटर्स की सूची में इंदौर जिला प्रदेश में अव्वल है। इंदौर में एक लाख 33 हजार 696 वोटर्स, भोपाल एक लाख 16 हजार 925 वोटर्स, जबलपुर में 69 हजार से अधिक, ग्वालियर में 68 हजार से अधिक और उज्जैन में 48 हजार से अधिक वोटर्स की मैंपिंग नहीं की जा सकी है।

प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने एसआईआर में अनमैप्ड वोटर्स को शामिल किए जाने  पर आपत्ति जताते हुए आयोग से इसकी बूथवार सूची मांगी है। वहीं सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने भी चुनाव आयोग से एबसेंट, अनमैप्ट और डेथ वाले वोटर्स की सूची बूथवार मांगी है। गौरतलब है कि मतदाता की प्रारूप सूची में अनमैप्ड वोटर्स को सामान्य वोटर्स के साथ ही रखा गया है, इस कारण ऐसे वोटर्स को पहचाना मुश्किल है। अनमैप्ड में उन वोटर्स की कैटेगरी है जिसमें संबंधित व्यक्ति अन्य राज्य का वोटर्स बना चुका है या संबंधित व्यक्ति अस्तित्व में नहीं पाए गए या वह 18 दिसंबर तक अपना  गठना पत्रक नहीं जमा कर पाए।

वोटर्स की शिफ्टिंग पर सवाल- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मैं यह बात बार-बार कह रहा हूँ और फिर चेतावनी दे रहा हूँ कि यह कोई तकनीकी प्रक्रिया नहीं, मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश है।अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह साफ़ तौर पर लोकतंत्र पर हमला माना जाएगा। SIR के नाम पर हर 13वां मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। 24 लाख महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं।  वोटरों के नाम एक जगह से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किए जा रहे हैं। मृत व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं। वास्तविक मतदाताओं को “अमान्य” घोषित किया जा रहा है। चुनाव आयोग और सरकार तत्काल स्पष्ट करें कि किसके आदेश पर वोट इधर-उधर किए जा रहे हैं और मृतकों के नाम जोड़े जा रहे हैं?

SIR के जरिए वोट चोरी का षंडयंत्र- पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि  मध्य प्रदेश में SIR के बाद 42.47 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।दावा किया गया है कि जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनमें 22 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से दिए गए पते से स्थानांतरित हो चुके हैं। जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है। पौने तीन लाख मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम मतदाता सूचियों में डुप्लिकेट हुए थे इसलिए काटे गए। अगर डुप्लिकेट मतदाताओं को छोड़ दें तो बड़ी संख्या में महिलाओं के जो नाम काटे हैं, इसका मुख्य कारण यह है कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारण उनके मूल दस्तावेजों में परिवर्तन नहीं हुआ। अक्सर यह भी देखा जाता है कि लोग एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं लेकिन राशन कार्ड, आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज़ उसी के साथ परिवर्तित नहीं होते। ऐसे मामलों में सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर पड़ता है।

इसके साथ ही कमलनाथ ने आगे लिखा  कि अब दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं वे अपने दस्तावेज़ दिखाकर दोबारा नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसी के साथ यह बात भी सामने आयी है कि अब भी बहुत से डुप्लीकेट मतदाता सूचियों में बचे हुए हैं और बहुत से मतदाताओं के पते बदल दिए गए हैं।इसका मतलब यह हुआ कि SIR के नाम पर मतदाता सूचियों को शुद्ध करने का काम पारदर्शी ढंग से नहीं हुआ है और इस प्रक्रिया में केवल भारत के नागरिकों को परेशान किया गया है। मुझे इस बात की पूरी आशंका है कि बड़े पैमाने पर वोट चोरी करने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया है और नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आह्वान करता हूँ कि जिन वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, उनके नाम जुड़वाने के लिए उनकी पूरी मदद करें और कोशिश करें कोई भी वैध वोटर मतदाता सूची से बाहर न रहे।
 

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