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मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ी, कर्नल सोफिया मामले में सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नराजगी

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supreme court vijay shah
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कर्नल सोफिया पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार से पूछा कि अभियोजन की मंजूरी देने में आखिर देरी क्यों हो रही है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब सरकार को उसके आदेश का पालन करना चाहिए और मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
 
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, "बहुत हो गया, मंत्री को सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी।" कोर्ट ने यह भी कहा कि SIT द्वारा अभियोजन की मंजूरी मांगे जाने के बाद राज्य सरकार को तुरंत फैसला लेना चाहिए था। वहीं सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मंत्री विजय शाह का उद्देश्य कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफ करना था, लेकिन वे अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पाए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बयान केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था।
 
क्या है पूरा मामला?- 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई 2025 की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत एयर स्ट्राइक की थी। कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं, जिन्होंने मीडिया को ऑपरेशन की जानकारी दी थी। इसके कुछ दिनों बाद मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कर्नल कुरैशी और उनके धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मंत्री विजय शाह के बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी को सेना और महिला अधिकारी का अपमान माना था। इसके बाद पुलिस ने विजय शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1)(b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज किया। ये धाराएं देश की संप्रभुता को खतरे में डालने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने जैसे आरोपों से जुड़ी हैं।
 
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और गर्मा सकता है।

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