मध्यप्रदेश में सड़क पर उतरेंगे 1.50 लाख शिक्षक, TET अनिवार्यता के आदेश का विरोध
8 अप्रैल को जिलों में, 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर और 18 अप्रैल को भोपाल में विरोध प्रदर्शन का एलान
Publish Date: Tue, 31 Mar 2026 (13:50 IST)
Updated Date: Tue, 31 Mar 2026 (14:00 IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में अब शिक्षक सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन का शंखनाद करने जा रहे हैं। 8 अप्रैल से जिलों में विरोध प्रदर्शन से शुरु होने वाला शिक्षकों का यह आंदोलन 18 अप्रैल को भोपाल में बड़े आंदोलन तक जारी रह सकता है। टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के डीपीआई के आदेश के विरोध में एकजुट होकर प्रदेश के 12 से अधिक शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन किया है, जिसके बैनर तले पूरी लड़ाई लड़ी जाएगी। आंदोलन की रणनीति को लेकर भोपाल के गांधी भवन में एक दर्जन से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक की,जहाँ आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।
आजाद अध्यापक संघ की प्रदेश अध्यक्ष शिल्पी शिवान, 'वेबदुनिया' से चर्चा में कहती हैं कि 29 मार्च को हुई बैठक में सभी संगठनों ने मिलकर तय किया है कि अब टीईटी और वरिष्ठता को लेकर एक साथ लड़ाई लड़ी जाएगी। आंदोलन के तहत पहले चरण में 8 अप्रैल को जिलों में शिक्षका अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराएंगे। वहीं 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं अगर उनकी मांगो लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो 18 अप्रैल को भोपाल में विरोध प्रदर्श होगा।
वह डीपीआई के फैसले पर सवाल उठाती हुए कहती हैं कि जब उनकी नियुक्ति पुराने नियमों के तहत हुई है तो अब परीक्षा लेने का क्या औचित्य है। उनका कहना है कि शिक्षकों को सरकार ने नहीं डीपीआई के उन अफसरों से दिक्कत है तो बिना सोचे समझे कोई आदेश निकाल देते है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीपीआई के अधिकारी 6 महीने तक चुप्पी साधे बैठे रहे और अब छुट्टी के दिनों में अचानक आदेश निकाल दिया, जो पूरी तरह से गलत है।
इसके साथ ही आजाद अध्यापक संघ की प्रदेश अध्यक्ष शिल्पी शिवान कहती हैं कि शिक्षकों को परीक्षा से भय नहीं है लेकिन लड़ाई उनकी अस्मिता और मान सम्मान की है। वह कहती है कि कायदे से परीक्षा ली जाती है नौकरी देने के लिए, लेकिन यहां तो इसके उल्टा नौकरी से हटाने के लिए परीक्षा ली जा रही है। वह कहती हैं कि अगर शिक्षकों से परीक्षा ली जानी चाहिए तो उन्हें तीन महीने अन्य कार्यों से सरकार शासकीय अन्य कार्यों से मुक्त रखे क्यों परीक्षा नाम ही ऐसा है जो बिना तैयारी के नहीं हो सकता है। वहीं वह वरिष्ठता के मुद्दें पर कहती है कि एक तरफ सरकार उनकी नियुक्ति 2018 से मान रही है, दूसरी तरफ परीक्षा लेने की बात कर रही हैं।
वहीं मध्यप्रदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता का मुद्दा पिछले दिनों संसद में भी उठा चुका है। रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट से भाजपा की सांसद अनिता नागर सिंह चौहान ने सदन में शून्य काल के दौरान टीईटी परीक्षा के मुद्दें को उठाते हुए परीक्षा की अनिवार्यता के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। सदन में उन्होंने बोलते हुए कहा कि शिक्षा के अधिकारी (आरटीई) के तहत 20 से 25 वर्ष से काम करने वाले शिक्षकों से दोबार योग्यता परीक्षा देने की बात सामने आई है। यह शिक्षक कई वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे है और उनके पास अच्छा अनुभव है, ऐसे में फिर से पात्रता परीक्षा लेने से उनके मन में चिंता और दबाव बन रहा है। इस निर्णय से शिक्षकों का मनोबल कमजोर हो रहा है और वह सरकार से मांग करती है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।
दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय के 2 मार्च को जारी आदेश के बाद प्रदेश में करीब डेढ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहा है। डीपीआई ने अपने आदेश में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TETपरीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। संयुक्त मोर्चा ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।
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भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल, धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।....
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