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MP विधानसभा के बजट सत्र का हंगामेदार आगाज, भगीरथपुरा कांड को लेकर कांग्रेस ने घेरा, राज्यपाल नहीं पढ़ पाएं पूरा अभिभाषण

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MP Assembly budget session begins with uproar
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का हंगामेदार आगाज हुई। सोमवार से शुरु हुए बजट सत्र की शुरुआत राज्यसभा मंगुभाई पटेल के अभिभाष के साथ हुई। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इससे  पहले सत्र की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई, जिसके बाद राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों और विकसित मध्य प्रदेश' के रोडमैप का उल्लेख करना शुरू किया। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार के द्वारा 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने जैसी अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख किया।
 
राज्यपाल ने सदन मे जैसे ही अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियां गिनानी शुरू कीं, तभी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और जहरीले कफ सीरप के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार राज्यपाल से सदन में झूठ बुलवा रही है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे,  कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह और सोहन बाल्मिकी ने सदन में इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा जोर शोर से उठाया। विपक्ष के सदस्यों ने सदन में जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि राज्यपाल का अभिभाषण जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अभिभाषण के बीच ही हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार गंभीर मुद्दों पर मौन है। वहीं  कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण के कॉफी नहीं मिलने पर एतराज जताया।
 
विपक्ष के लगाता हंगामे के चलते राज्यपाल अपना अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ सके। इसके साथ स्पीकर नरेद्र सिं तोमर ने कहा कि राज्यपाल ने अपने अभिभाषण का जो हिस्सा नहीं  पढ़ा है, उसको भी पढ़ा  मााना जाएगा और सदन में इस पर 17 फरवरी को  चर्चा होगी। इसके बाद सनद की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। गौरतलब है कि इस बजट सत्र में कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं और राज्य का मुख्य बजट 18 फरवरी को पेश किया जाएगा। 
 
जीतू पटवारी ने फिर उठाया मंत्रियों के इस्तीफे का मुद्दा- वहीं बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवाराी भी विधानसभा पहुंचे। जहां पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए जब तक प्रदेश के तीन दागी मंत्री विजय शाह, राजेंद्र शुक्ल और कैलाश विजयवर्गीय अपने पदों पर बने रहेंगे, तब तक राज्यपाल के अभिभाषण का कोई औचित्य नहीं है।

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