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मध्यप्रदेश के किसानों पर युद्ध की मार, बारदाना संकट से सरकारी खरीदी नहीं, बदलते मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता

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The Iran-Israel war has hit Madhya Pradesh farmers
मिडिया ईस्ट में ईरान के अमेरिका और इजरायल के साथ छिड़े भीषण युद्द की मार मध्यप्रदेश के किसानों पर पड़ी है। युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत के कारण पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैग के उत्पादन में भारी कमी आई है, इससे मध्यप्रदेश में सरकार के सामने गेहूं रखने के लिए बारदाना का संकट खड़ा हो गया है। बारदाने की कमी के चलते प्रदेश में इस बार गेहूं की सरकारी खरीदी में लगभग एक महीने की देरी हो चुकी है।

सरकार ने तीसरी बार समर्थन मूल्य पर प्रदेश में गेहूं की खरीदी  की तारीख आगे बढ़ाते हुए अब प्रदेश के 6 संभागों में 10 अप्रैल से और शेष प्रदेश में 15 अप्रैल से खरीदी का फैसला किया है। प्रदेश के 6 संभाग इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल में गेहूँ की खरीदी का कार्य 10 अप्रैल से शुरु होगा। वहीं प्रदेश के अन्य संभागों में गेहूं की खरीदी 15 अप्रैल से शुरु होगी। गौरतलब है कि प्रदेश में इस वर्ष लगभग 12 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है और करीब 100 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी का अनुमान है।
 
किसानों पर दोहरी मार-एक ओर सरकार बारदाना संकट के कारण गेहूं खरीदी नहीं कर पा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में 80 फीसदी किसानों का गेहूं खेतों मे तैयार खड़ा हुआ है और बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल काट चुके हैं। प्रदेश में लगातार मौसम के बदलते रुख और कई जिलों में पानी के साथ ओले गिरने से किसानों की फसल खराब होना शुरु हो चुकी है। बुधवार को राजधानी भोपाल समेत सीहोर, विदिशा के साथ ग्वालियर -चंबल के कई जिलों में बारिश और ओले  गिरने से फसल को भारी नुकसान हुआ है। सीहोर के किसान प्रवीन परमार बताते है कि उनके खेतों में गेहूं की फसल तैयार खड़ी है लेकिन सरकारी खरीदी नहीं होने और मंडियों में दाम बहुत कम मिलने से वह फसल की कटाई नहीं कर रहे है। वह कहते है कि जिले में उनके जैसे बहुत से किसानों के सा्मने यहीं संकट है। बुधवार को बारिश के साथ गिरे ओलों ने कुछ इलाकों में किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। 
 
समर्थन मूल्य से कम पर गेहूं बेचने को मजबूर किसान- समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी नहीं होने और मौसम की मार के चलते किसान बाजार में औने-पौने दामों पर गेहूं बेचने को मजबूर है। किसान बताते हैं कि मंडियों में गेहूं के दो हजार से बाइस सौ रुपया प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि सरकार ने बोनस मिलाकर गेहूं का समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल मूल्य 2625 रुपए तय किया है। इधर किसानों को मंडियों और व्यापारियों को गेहूं 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे किसानों को भारी नकुसान उठाना पड़ रहा है।
 
जीतू पटवारी ने दी धरने की दी चेतावनी- मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी में बारदाना संकट को लेकर अब कांग्रेस मुखर हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बारदाने का पर्याप्त इंतजाम नहीं किया गया है, जिसके चलते सरकार गेहूं खरीदी से कतरा रही है। जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा सरकार किसानों से यह कहकर गेहूं खरीदी टाल रही है कि मंडियों में बारदानों की कमी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खरीदी के लिए तैयार नहीं है, तो फिर किसानों की उपज का क्या होगा। जीतू पटवारी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों की समस्या  को रखा है और चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने किसानों के लिए पर्या्प्त बारदाने का पबंध नहीं किया तो वह कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल बंगले के सामने उपवास पर बैठेंगे। 
 

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