Publish Date: Fri, 20 Feb 2026 (12:20 IST)
Updated Date: Fri, 20 Feb 2026 (12:40 IST)
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को अपनी औकात में रहो वाले बयान पर सूबे की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के बायन को प्रदेश के आदिवासियों का अपमान बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज का अपमान बताते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की और पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।
वहीं शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि उन्होंने जो बात सदन में उठाई वह प्रदेश की जनता के हित में उठाई। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार के मंत्री किसको औकात दिखा रहे है। क्या आम बिजली उपभो्क्ताओं को औकात दिखा रहे है या उन आदिवासियों को औकात दिखा रहे है जिनको अडानी की खदान को लेकर उनके जंगलों से बाहर किया जा रहा है। उमंग सिंघार ने कहा कि मंत्री जिस तरह बेजुबानी और असंसदीय भाषा को उपयोग करते है उसके कांग्रेस पार्टी बिना डरे, बिन झुके जनता की आवाज उठाती रहेगी।
क्या है पूरा मामला? इससे पहले गुरुवार को सदन में रा्ज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौारन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच उस समय तीखा विवाद खड़ा हो गया जब संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को अपनी औकात में रहो कह दिया। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली में सरकार और अदाणी समूह के बीच हुए एक बिजली समझौते पर सवाल उठाते हुए इसे 1.25 लाख करोड़ रुपए का घोटाला बताया, जिस पर सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्यकमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए सदन में प्रमाण रखने की बात की। देखते ही देखते सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बीच जुबानी जंग शुरु हो गई है और सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष के विधायक आसंदी के सामने आ गए।
जिसके चलते सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। सदन शुरु होने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने चिंता व्यक्त की औरमुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में सभी की ओर से खेद जताते हुए माफी मांगी। वहीं संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी कहा कि उनके 37 साल के संसदीय करियर में यह पहली बार था जब उन्होंने अपना आपा खोया और वे स्वयं अपने इस व्यवहार से खुश नहीं हैं।