shiv chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

वंदे मातरम् गीत और बिरसा मुण्डा के संघर्ष ने स्वतंत्रता आंदोलन को दिया जनाधार : राज्यपाल पटेल

Advertiesment
हमें फॉलो करें Mangubhai Patel
भोपाल , मंगलवार, 20 जनवरी 2026 (08:24 IST)
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा का जमीनी, जन-आधारित संघर्ष और ‘वंदे मातरम्’ के वैचारिक–आध्यात्मिक स्वरों ने मिलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जनाधार प्रदान किया था। आंदोलन को स्पष्ट दिशा और आत्मिक शक्ति देने के साथ ही भारत की विविधता में निहित शक्ति और एकता को प्रमाणित किया। उन्होंने कहा कि आजादी के संघर्ष में शिक्षित, शहरी, ग्रामीण और वंचित वर्गों ने मिलकर स्वतंत्र राष्ट्र का स्वप्न साकार किया। इसी भाव-भावना के साथ संकल्पित होकर युवाओं को विकसित भारत–2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय चेतना के दो स्वर विषय पर आयोजित विचारोत्तेजक आयोजन में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे।
 
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें है। भारत की आत्मा और चेतना का यह भाव राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समाज के प्रति संवेदना और संस्कृति के प्रति सम्मान का है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा एवं ‘वंदे मातरम्’ के रचनाकार बंकिम चंद्र चटर्जी की 150वीं जयंती के पावन प्रसंग का यह प्रकल्प “स्वतंत्रता के दो स्वर” भारत की आज़ादी के बहुआयामी, समावेशी और जन–जन की साझी साधना का स्मरण है। भगवान बिरसा मुण्डा केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि जनजातीय चेतना, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक स्वाभिमान के महान प्रतीक थे। उनका “अबुआ दिशुम, अबुआ राज”, जनजातीय समुदाय की स्वतंत्रता–आकांक्षा का उद्घोष था, जिसने जल, जंगल और जमीन पर अधिकार के साथ ही आत्मनिर्णय की चेतना को सशक्त किया। स्वतंत्रता आंदोलन को ग्रामीण भारत की आत्मा तक पहुँचाया।

‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक और भावनात्मक आत्मा बनकर उभरा। इस गीत ने राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना को जनमानस में प्रतिष्ठित किया। देशवासियों को मानसिक और नैतिक रूप से एकजुट किया। ‘वंदे मातरम्’ ने भारत माता की सजीव कल्पना के माध्यम से भारतवासियों में आत्मगौरव और सांस्कृतिक एकता का संचार किया आज़ादी के दीवानों को संघर्ष के कठिन क्षणों में अदम्य साहस और नैतिक बल प्रदान किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुण्डा और बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया। कलाव्योम फाउंडेशन को सार्थक और विचारोत्तेजक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी।
 
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत ने कहा कि भगवान के स्तर पर पहुँच गए जनजातीय नेतृत्व और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक गीत की 150वीं वर्ष गांठ का प्रसंग उनकी जीवनी, चरित्र और गतिविधियों को अपने जीवन, चरित्र और दिनचर्या में अमल करना होगा।
 
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री रमेश शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् गीत, भगवान बिरसा मुण्डा का अबुआ दिशुम अबुआ राज और उलगुलान के सूत्र एक समान है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा किया गया अलगाव भारतीय दर्शन और विज्ञान दोनो के अनुसार अनुचित है। उन्होंने कहा कि भारत के जनजातीय समुदाय के तार ऋषि-परंपरा से जुड़े हुए है। यही कारण है कि भारत में संस्कार, शिक्षा, अनुसंधान और शोध के केंद्र वनों में ही थे। भगवान श्रीराम भी अध्ययन के लिए वन में गए थे। उन्होंने कहा कि समय की जरूरत है कि इतिहास से सबक लें अलगाववादी प्रवृत्तियों से सावधान रहें।
 
विषय प्रवर्तन चिंतक विचारक डॉ. अमोघ गुप्ता ने किया। इस अवसर पर जनजातीय लोक कलाकार गजेन्द्र आर्य ने भगवान बिरसा मुण्डा के व्यक्तित्व और कृतित्व का शौर्य गान किया।
 
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने भगवान बिरसा मुण्डा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किए। इस अवसर पर कार्यक्रम में संस्था के श्री आलोक शर्मा, कलाव्योम फाउंडेशन के अध्यक्ष अशोक, सचिव अपर्णा भोसले, डॉक्टर प्रदीप मेवाडा, मोहित सिंह और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

कौन हैं नितिन नबीन जो बने भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष, क्या है उनके सामने चुनौतियां?