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युद्ध का असर: मध्यप्रदेश में अब 1 अप्रैल से होगी गेहूं की खरीदी, पीई बैग्स-बोरों की कमी से भंडारण की चुनौती

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Wheat procurement in Madhya Pradesh postponed; Iran-Israel war impacts wheat procurement; shortage of PE bags and sacks poses storage challenges.मध्यप्रदेश गेहूं की खरीदी टली
मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध का असर अब भारत पर भी पड़ने लगा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर दिखने लगाया है। युद्ध के असर से जहां मध्यप्रदेश में रसोई गैस को लेकर लोगों को लंबी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी ओर प्रदेश में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया पर भी संकट के बादल मंडराने लगा है।

पेट्रोलियम उत्पादों की किल्लत के कारण पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैग का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे प्रदेश में गेहूं के भंडारण के लिए पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बैग के बोरों की कमी हो गई है। इसको देखते हुए सरकार ने 16 मार्च से शुरू होने वाली गेहूं खरीदी की तारीख को आगे बढ़ाकर 1 अप्रैल कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश में इस वर्ष लगभग 12 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है और करीब 100 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी का अनुमान है।

सरकार ने गठित की कमेटी- मध्य-पूर्व एशिया की स्थिति को देखते हुए प्रदेश में पड़ने वाले प्रभावों की निरंतर निगरानी एवं उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिये मंत्रि-मंडल समिति का गठन किया गया है। समिति में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप को सदस्य मनोनीत किया गया है।

समिति प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी गैस, उर्वरक और अन्य अत्यावश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये विचार कर अपनी अनुशंसा देगी। समिति, राज्य शासन की ओर से की जाने वाली पहल अथवा नीतिगत निर्णयों के लिये भी केन्द्र सरकार के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन को अपनी अनुशंसा देगी। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण समिति के सदस्य सचिव होंगे। वित्त, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सहित संबंधित विभागों के भारसाधक सचिव समिति में स्थाई आमंत्रित सदस्य होंगे। समिति का कार्यकाल आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।

गेहूं खरीदी में देऱी से बढ़ेगी किसानों की समस्या- प्रदेश में गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ने का सबसे सीधा असर प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा। होली के बाद अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर किसानों की फसल पककर तैयार हो चुकी है और बड़ी संख्या में किसानों की फसल कट भी गई है। बड़ी संख्या में किसानों के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण फसल के खराब होने की आंशका भी रहेगी। इसके साथ खेतों में खड़ी तैयार फसल पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहता है। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। इसके अलावा  आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पैसों की आवश्यकता होती है; ऐसे में सरकारी खरीदी में देरी उन्हें कम दामों पर निजी व्यापारियों को फसल बेचने के लिए मजबूर कर सकती है। जिससे उन्हें अपनी फैसला का सहीं दाम नहीं मिलने का डर भी सता रहा है।
 

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