महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर बापू के त्याग, अहिंसा और उनके अमर विचारों को समर्पित एक भावपूर्ण कविता:
गोलियों की आवाज़ से नहीं,
तू सत्य की गूंज से अमर हुआ,
हिंसा के अंधेरों में भी
तेरा दीपक कभी न मरा।
न शस्त्र उठाए, न सिंहासन मांगा,
बस चरखे की धुन में देश जगाया,
नंगे पांव चला तू इतिहास में,
और समय ने सिर झुकाया।
तेरी आंखों में भारत था,
भूखा, नंगा, पर स्वाभिमानी,
तेरे शब्दों में शक्ति थी
जो तोड़ गई हर ज़ंजीर पुरानी।
आज भी जब विवेक डगमगाए,
जब ताकत सच को दबाने आए,
बापू, तेरा मौन हमें
फिर सही राह दिखाने आए।
पुण्यतिथि नहीं, यह संकल्प का दिन है-
कि सत्य झुकेगा नहीं,
कि अहिंसा केवल शब्द नहीं,
बल्कि जीने की सबसे बड़ी शक्ति सही।