30 जनवरी 1948 को शाम 5:17 बजे जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को तीन गोलियां मारीं, तो उसके तुरंत बाद देश में भारी अफरा-तफरी, दुख और राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल बन गया। इसके बाद ब्राह्मण विरोधी दंगे प्रारंभ हो गए और लोगों को घर से निकालकर जिंदा जलाए जाने के समाचार के समाचार भी समाने आने लगे। जानिए विस्तार से।
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गोडसे की गिरफ्तारी और भीड़ का गुस्सा
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गांधी जी की मृत्यु और नेहरू का संबोधन
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ब्राह्मणों का नरसंहार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाया गया आरोप
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मुकदमा और अदालती कार्यवाही
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फांसी की सजा
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अस्थियों का विसर्जन
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फांसी की सजा माफ करने की अपील
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नाथूराम गोडसे शहीद या आतंकवादी?
1. गोडसे की गिरफ्तारी और भीड़ का गुस्सा
गोली चलाने के तुरंत बाद नाथूराम गोडसे ने भागने की कोशिश नहीं की। उसने हाथ ऊपर कर दिए और पुलिस को बुलाया। पास खड़े लोगों ने उसे पकड़ लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे भीड़ से बचाया और तुगलक रोड थाने ले गई।
2. गांधी जी की मृत्यु और नेहरू का संबोधन
गांधी जी को तुरंत बिड़ला हाउस के भीतर ले जाया गया, जहाँ कुछ ही समय बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उसी रात प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो (AIR) पर देश को संबोधित करते हुए भावुक शब्दों में कहा:
"हमारे जीवन से रोशनी चली गई है और चारों तरफ अंधेरा है..."
3. ब्राह्मणों का नरसंहार
गांधी जी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों, विशेषकर महाराष्ट्र में ब्राह्मण विरोधी हिंसा भड़क उठी, क्योंकि गोडसे एक चितपावन ब्राह्मण था। चितपावन ब्राह्मणों को घर से निकालकर जिंदा जला दिया गया। लाखों ब्राह्मणों को पलायन करना पड़ा। हजारों ब्राह्माणों को मौत के घाट उतार दिया गया।
4. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाया गया आरोप
लोगों में यह अफवाह फैल गई की नाथूराम गोड़से संघ से जुड़ा आदमी था। स्थिति को बिगड़ने से रोकने और गांधी जी की विचारधारा की रक्षा के लिए तत्कालीन गृहमंत्री सत्यव्रत सरदार वल्लभभाई पटेल ने 4 फरवरी 1948 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगा दिया (जो बाद में हटा लिया गया था)।
5. मुकदमा और अदालती कार्यवाही
गांधी हत्या का मुकदमा दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में चला।
आरोपी: नाथूराम गोडसे के साथ नारायण आप्टे, विनायक दामोदर सावरकर और 6 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया।
सावरकर की रिहाई: सबूतों के अभाव में वीर सावरकर को बरी कर दिया गया।
गोडसे का बयान: गोडसे ने अदालत में अपना लंबा बयान दिया, जिसमें उसने गांधी जी पर मुस्लिम तुष्टीकरण और विभाजन का आरोप लगाकर अपनी कार्रवाई को सही ठहराया।
6. फांसी की सजा
10 फरवरी 1949 को अदालत ने फैसला सुनाया। नाथूराम गोडसे और मुख्य साजिशकर्ता नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई। अन्य दोषियों को उम्रकैद मिली। 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में गोडसे और आप्टे को फांसी दे दी गई।
7. अस्थियों का विसर्जन
गांधी जी की अंतिम यात्रा में करीब 10 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। उनकी अस्थियों को देश की विभिन्न पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया। गोडसे की अंतिम इच्छा थी कि उसकी अस्थियां तब तक विसर्जित न की जाएं जब तक 'अखंड भारत' का सपना पूरा न हो जाए (उसकी अस्थियां आज भी पुणे में सुरक्षित रखी हैं)।
8. फांसी की सजा माफ करने की अपील:
गांधी जी के दो बेटों, मणिलाल और रामदास गांधी ने गोडसे की फांसी की सजा को माफ करने की अपील की थी, क्योंकि उनका मानना था कि उनके पिता अहिंसा के पुजारी थे और किसी को मृत्युदंड देने के पक्ष में नहीं होते। हालांकि, सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया था।
9. कौन थे नाथूराम गोड़से?
जीवन और विचार: नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुआ था। वह एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। गोडसे ने अपने जीवन में हिंदू राष्ट्रवाद के विचारों को अपनाया और हिंदू महासभा में शामिल हो गए। वे कभी भी RSS से नहीं जुड़े थे।
क्यों की गांधीजी की हत्या: गोडसे ने गांधी को भारत के विभाजन और मुसलमानों के प्रति उनकी नीतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया था। गोडसे का मानना था कि यदि धर्म के नाम पर हो रहा है विभाजन तो मुसलमानों को यहां रोकना हिंदुओं के भविष्य को असुरक्षा में डालना सिद्ध होगा। गोली मारने के बाद भी गोडसे ने कहा कि उसने वही किया जो उसे करना था और उसे कोई पछतावा नहीं था।
10. नाथूराम गोडसे शहीद या आतंकवादी?
नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई थी। उनकी फांसी के बाद, उनके समर्थकों ने उन्हें एक शहीद के रूप में सम्मानित किया। नाथूराम गोडसे की हत्या और उनके विचारों को लेकर बहुत विवाद है। कई लोगों ने उनकी आलोचना की है और उन्हें एक आतंकवादी कहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है और उन्हें एक हिंदू राष्ट्रवादी के रूप में देखा है।