Ambernath Maharashtra Politics : महाराष्ट्र के अंबरनाथ में अब एक नया सियासी खेला हुआ है। यहां एकनाथ शिंदे को अंबरनाथ की सत्ता से दूर करने के लिए भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन हुआ था, लेकिन 12 निर्वाचित कांग्रेस पार्षदों के निलंबन के बाद अब अंबरनाथ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, भाजपा ने अंबरनाथ में बड़ा दांव खेला है। भाजपा ने कांग्रेस के सभी 12 पार्षदों को पार्टी में शामिल कर लिया। जिसके बाद अब ऐसा लग रहा है कि शिंदे सत्ता से दूर तो रहेंगे ही, अंबरनाथ भी कांग्रेस मुक्त ही रहेगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का कहना है कि कांग्रेस पार्षदों ने जनता से विकास का वादा किया था। ऐसे में उन्होंने भाजपा के साथ आने का निर्णय लिया।
खबरों के अनुसार, अंबरनाथ में अब एक नया सियासी खेला हुआ है। यहां एकनाथ शिंदे को अंबरनाथ की सत्ता से दूर करने के लिए भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन हुआ था, लेकिन 12 निर्वाचित कांग्रेस पार्षदों के निलंबन के बाद अब अंबरनाथ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, भाजपा ने अंबरनाथ में बड़ा दांव खेला है। भाजपा ने कांग्रेस के सभी 12 पार्षदों को पार्टी में शामिल कर लिया।
20 दिसंबर को चुनावों के बाद पार्षदों ने भाजपा संग मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' (AVA) को बनाया था। इसके कारण कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया। बुधवार देर रात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इन पार्षदों के पार्टी में शामिल होने का औपचारिक ऐलान किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का कहना है कि इन पार्षदों ने जनता से विकास का वादा किया था।
ऐसे में उन्होंने भाजपा के साथ आने का निर्णय लिया। यहां नुकसान कांग्रेस का ही हुआ है और फायदा भाजपा का, साथ ही शिंदे गुट भी महानगरपालिका से दूर हो गया है। जिसके बाद अब ऐसा लग रहा है कि शिंदे सत्ता से दूर तो रहेंगे ही, अंबरनाथ भी कांग्रेस मुक्त ही रहेगा। कांग्रेस पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर पार्टी का आधार काफी मजबूत हुआ है।
अब भाजपा की अगुवाई वाली यह अघाड़ी अंबरनाथ नगर परिषद में अगुवाई करेगी। अंबरनाथ में हुए भाजपा-कांग्रेस गठबंधन के फैसले पर खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद गठबंधन टूट गया था।
Edited By : Chetan Gour