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भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर, संसद में लड़ते हैं, चाय पर मुस्कराते हैं...

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 (15:05 IST)
Ministers and MPs hold discussions over tea: संसद का शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए समाप्त हो गया है। सत्र के दौरान जो सांसद एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधते हैं, वही एक साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लेते और मुस्कराते हुए नजर आए। 'चाय पर चर्चा' की परंपरा भारतीय लोकतंत्र की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करती है, जहां पक्ष और विपक्ष के नेता सौहार्दपूर्ण वातावरण में मिलते हैं।
 
हंगामेदार रहा संसद का ‍सत्र : संसद का शीतकालीन सत्र, जो 'वोट चोरी' (SIR) और अन्य मुद्दों को लेकर काफी हंगामेदार रहा, शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। लेकिन सत्र समाप्त होते ही संसद परिसर के भीतर का नजारा पूरी तरह बदल गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर में आयोजित इस पारंपरिक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्ता पक्ष के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ विपक्षी नेता भी शामिल हुए। प्रियंका गांधी वाड्रा और प्रधानमंत्री मोदी के बीच संक्षिप्त बातचीत और हंसी-मजाक के पल देखे गए।
मुस्करा रही थीं प्रियंका गांधी : इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष बिरला और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक सोफे पर बैठे नजर आ रहे थे, जबकि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री मोदी के लगभग सामने और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ठीक पास में अलग सोफे पर बैठी नजर आ रही थीं। प्रियंका और कुछ अन्य सांसद मुस्कराते हुए नजर आए। हालांकि बातचीत का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है। यह दृश्य दिखाता है कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद राष्ट्रहित और व्यक्तिगत शिष्टाचार सर्वोपरि हैं।
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सदन में हंगामे का जिक्र : बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी और पीएम के बीच कुछ देर तक हल्की-फुल्की बातचीत हुई, जिसने सबका ध्यान खींचा। बातचीत के दौरान सदन में हुए हंगामे और नारेबाजी का भी अनौपचारिक जिक्र हुआ। स्पीकर ने मुस्कराते हुए सांसदों से कहा कि सदन के बाहर आप लोग इतने अच्छे हैं, तो भीतर भी ऐसा ही सहयोग बना रहना चाहिए। कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों के पास होने पर पक्ष और विपक्ष के बीच एक-दूसरे को श्रेय देने की बजाय संसदीय प्रक्रिया की सफलता पर संतोष व्यक्त किया गया।
 
हालांकि सत्र के समापन पर राज्यसभा के सभापति ने सदस्यों के व्यवहार पर कुछ चिंताएं भी जताईं (जैसे कागजात फाड़ना), लेकिन साथ ही शून्यकाल और प्रश्नकाल में बढ़ी उत्पादकता की सराहना भी की।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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