Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 (17:27 IST)
Updated Date: Wed, 25 Mar 2026 (17:31 IST)
यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बुधवार को अदालत ने इस मामले में दोनों को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। इससे पहले 17 मार्च को आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट में 883 पन्नों का जवाब दाखिल कर जमानत का विरोध किया था और शंकराचार्य की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।
हाईकोर्ट का फैसला
गौरतलब है कि कोर्ट ने 27 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं कर देती तब तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट भी मंजूर'
जमानत मिलने के बाद काशी (वाराणसी) से अपनी पहली प्रतिक्रिया में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि
सच्चाई सामने लाने के लिए जो भी जरूरी हो, हम उसके लिए तैयार हैं, यहां तक कि नार्को टेस्ट भी। झूठ लंबे समय तक नहीं टिकता। हम अदालत में सभी सबूत पेश करेंगे। यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आता, तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
यह था पूरा मामला
यह विवाद प्रयागराज माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था। मामले की कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
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18 जनवरी (मौनी अमावस्या): माघ मेले के दौरान शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ।
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24 जनवरी: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिसमें महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया।
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8 फरवरी: पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में याचिका दायर की गई।
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21 फरवरी: कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उन पर बच्चों के साथ कुकर्म और दुष्कर्म का आरोप लगा।
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24 फरवरी: शंकराचार्य ने प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी।
किसने की पैरवी
शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन. मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने रखा। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से अधिवक्ता रीना सिंह ने बहस की थी। फिलहाल, हाईकोर्ट के इस फैसले से शंकराचार्य को गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है। Edited by : Sudhir Sharma
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