Dharma Sangrah

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

राज्यसभा में गरजे अमित शाह, नेहरू ने किए वंदे मातरम के 2 टुकड़े, इंदिरा ने लगाया आपातकाल

Advertiesment
हमें फॉलो करें amit shah

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , मंगलवार, 9 दिसंबर 2025 (14:20 IST)
Amit Shah on Vande Matram : गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि जब वंदे मातरम के 50 वर्ष हुए तब नेहरू ने इसके 2 टुकड़े किए थे। जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ, तब महिमामंडन नहीं हुआ क्योंकि वंदे मातरम बोलने वालों को इंदिरा जी ने जेल में बंद कर दिया गया था। देश में आपातकाल लगाया गया था, विपक्ष के लाखों लोगों को, लाखों स्वयंसेवियों, लाखों समाजसेवियों को जेल में बंद कर दिया गया। 
 
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने उस राष्ट्र को जागृत किया जो अपनी दिव्य शक्ति को भूल चुका था। राष्ट्र की आत्मा को जगाने का कार्य वंदे मातरम ने किया। उस जमाने में वंदे मातरम, देश को आजाद बनाने का कारण बना और अमृतकाल में देश को विकसित और देश को महान बनाने का नारा बनेगा। 
 
अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम... मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने का नारा बना था, आजादी के उद्घोष का नारा था, आजादी के संग्राम का प्रेरणास्रोत था और शहीदों के लिए अंतिम बलिदान देते समय अगले जन्म में भी भारत में ही जन्म लेकर फिर से मां भारती के लिए बलिदान देने की प्रेरणा बना था। 
 
वंदे मातरम पर क्या बोले थे बंकिम बाबू : जब अंग्रेजों ने वंदे मातरम् पर कई सारे प्रतिबंध लगाए तक बंकिम बाबू ने एक पत्र में लिखा था, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, मेरे सभी साहित्य को गंगा जी में बहा दिया जाए। यह मंत्र वंदे मातरम्, अनंत काल तक जीवित रहेगा, यह एक महान गान होगा और लोगों के हृदय को जीत लेगा और भारत के पुनर्निर्माण का यह मंत्र बनेगा।
 
नेहरू ने की तुष्‍टिकरण की शुरुआत : अमित शाह ने कहा कि ये तो वंदे मातरम का 150वां साल है। अब हम पीछे देखते हैं... जब वंदे मातरम के 50 साल पूरे हुए, तब देश आजाद नहीं हुआ था, और वंदे मातरम की जब स्वर्ण जयंती हुई, तब जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम के दो टुकड़े कर उसे दो अंतरों तक सीमित कर दिया और वहीं से तुष्टिकरण की शुरुआत हुई और ये तुष्टिकरण देश के विभाजन का आधार बना। अगर कांग्रेस, तुष्टिकरण की नीति के तहत वंदे मातरम् का बंटवारा नहीं करती तो देश का बंटवारा नहीं होता, आज देश पूरा होता। 
 
लोकसभा में कब से हो रहा है वंदे मातरम गान : उन्होंने कहा कि 1992 में भाजपा सांसद राम नाईक ने एक शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन के माध्यम से वंदे मातरम को संसद में फिर से गाने का मुद्दा उठाया। उस समय प्रतिपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी जी ने बहुत प्रमुखता से लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि इस महान सदन के अंदर वंदे मातरम का गान होना चाहिए क्योंकि संविधान सभा ने इसे स्वीकार किया है। तब लोकसभा ने सर्वसम्मति से लोकसभा में वंदे मातरम के गान की शुरुआत की।
 
विपक्ष पर हमला : शाह ने कहा कि उस समय, जब हम वंदे मातरम के गान की शुरुआत कर रहे थे, तब इंडी अलायंस के ढेर सारे लोगों ने कहा कि हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे। और मैंने यह भी देखा है कि जब संसद में वंदे मातरम का गान होता है, तो इंडी अलायंस के कई सदस्य, जो लोकसभा में बैठे होते हैं, बाहर चले जाते हैं। 
 
मुद्दों पर चर्चा से नहीं डरते : गृहमंत्री शाह ने कहा, मैं कल देख रहा था कि कांग्रेस के कई सदस्य, वंदे मातरम की चर्चा को, राजनीतिक हथकंडा या मुद्दों से ध्यान भटकाने का हथियार मान रहे थे। मुद्दों पर चर्चा करने से हम नहीं डरते। संसद का बहिष्कार हम नहीं करते। अगर संसद का बहिष्कार न किया जाए और ससंद चलने दी जाए तो सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। हम डरते नहीं हैं और न ही हमारे पास कुछ छिपाने को है। कोई भी मुद्दा हो, हम चर्चा करने को तैयार हैं।
edited by : Nrapendra Gupta

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

जन्मदिन पर सोनिया गांधी को कोर्ट का नोटिस, वोटर लिस्ट में फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने का आरोप