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राम मंदिर के तर्ज पर भोजशाला में बनेगा भव्य मंदिर?, राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रक्रांत सोमपुरा डिजाइन करने को तैयार

राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने वेबदुनिया से कहा, भोजशाला के लिए भी तैयार कर सकते है मां सरस्वती के दिव्य मंदिर का डिजाइन

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Bhojshala Temple
भोजशाला को जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। हाईकोर्ट ने विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप को माता वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर सहित भोजशाला माना है। भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसले की तुलना अयोध्या में राममंदिर के फैसले से हो रही है। वहीं हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या में राम मंदिर के फैसले के सिद्धांतों और कानूनी आधारों का प्रमुखता से जिक्र किया हैं।

ऐसे में भोजशाला पर आए इस निर्णय निर्णय को अयोध्या-2 के तौर पर देखा जा रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब भोजशाला के भव्य स्वरूप देने की मांग उठने लगी है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के संयोयक गोपाल शर्मा ने मांग की है कि लंदन में मां वाग्देवी की प्रतिमा लगाकर भोजशाला में स्थापित कर राजा भोज के काल में भोजशाला को जो भव्य स्वरूप था, उस स्वरूप में मंदिर की स्थापना हो।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और पूजना अर्चना कर भव्य मंदिर बनाने की मांग की। ऐसे में सवाल यह उठ रहा हैं कि क्या भोजशाला में आने वाले समय अयोध्या के राममंदिर की तरह मां सरस्वती का भव्य मंदिर बनेगा? 

राम मंदिर की तर्ज पर भोजशाला में बनेगा मंदिर?- न्यायालय  के फैसले के बाद जिस तरह से अयोध्या में भव्य राममंदिर बना है, क्या अब भोजशाला में राममंदिर की तर्ज मां सरस्वती का भव्य मंदिर बनेगा। खुद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद कहा कि भोजशाला के संबंध में न्यायालय ने माना है कि यह स्थान भोजशाला का ही था, जहां राजा भोज ने मां वाग्देवी के माध्यम से इस स्थान की महत्ता को स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस स्थान को और अधिक गौरवन्वित करेंगे और वाग्देवी की प्रतिमा को लाने का प्रबंध करेंगे।

ऐसे में क्या राममंदिर की तर्ज पर भोजशाला में मंदिर का निर्माण होगा इसको लेकर ‘वेबदुनिया’ ने अयोध्या में भव्य राममंदिर के निर्माण के  वस्तुकार पद्मश्री चंद्रकांत सोमपुरा से खास बातचीत की।

'वेबदुनिया' से बातचीत में वस्तुकार पद्मश्री चंद्रकांत सोमरपुरा कहते हैं कि भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के निर्णय को उन्होंने भी मीडिया के माध्यम से देखा है। वह कहते हैं कि कुछ सालों पहले जब वह रतलाम में एक मंदिर का निर्माण कर रहे थे, तब उन्होंने भोजशाला को दौरा किया था और उसके स्थापत्य को देखा था।

वह कहते हैं कि भोजशाला मूल रूप से परमारकालीन नागर शैली का मंदिर है। यह परमार राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर मां सरस्वती को मंदिर है। ऐसे में अब अगर उनसे भोजशाला को भव्य स्वरूप देने और मंदिर निर्माण का नक्शा बनाने के लिए संपर्क किया जाता हैं, तो वह जरूर मंदिर को भव्य स्वरूप में बनाने का कार्य करेंगे। 

चंद्रकांत सोमपुरा कहते हैं कि भोजशाला मंदिर के लिए अगर उनसे संपर्क किया जाता है तो उन्हें खुशी होगी, क्योंकि उनके दादा जी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर का डिजाइन किया था, वहीं उन्होंने अयोध्या में राममंदिर के साथ मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर का डिजाइन करने के साथ राजस्थान के सांवरिया सेठ का मंदिर और गुजरात में अंबाजी माता मंदिर और रतलाम के मांगल्य मंदिर को डिजाइन किया है।
 
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राममंदिर की तरह नागर शैली पर भोजशाला मंदिर?- भोजशाला को किस तरह से भव्य स्वरूप में विकसित किया जा सकता हैं और मंदिर का क्या डिजाइन हो सकता है, इस सवाल पर चंद्रकांत सोमपुरा कहते हैं कि इसके लिए पहले भोजशाला का एक बार भ्रमण करना होगा, अभी वर्तमान में जो डिजाइन है उसका अध्ययन करना होगा, वर्तमान में गर्भगृह की लंबाई, चौड़ाई और आसपास के कॉरिडोर का अध्ययन करना होगा।

वह कहते है कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है तो इसका विकास भी उसी तर्ज पर होना चाहिए। वर्तमान में भोजशाला राममंदिर के तरह नागर शैली में बना हुआ है और इसे वर्तमान ड्राइंग के आधार पर कुछ बदलाव के साथ इसे भव्य स्वरूप दिया जा सकता है। उत्तर भारत, मध्यभारत और पश्चिम भारत में मंदिरों का निर्माण नागर शैली में होता है। अयोध्या में बना राममंदिर भी भवगान राम के अनुरूप नागर शैली का अष्टकोणीय शिखर वाला राममंदिर है। 

क्या कहा था मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने?- भोजशाला पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि  भोजशाला के संबंध में न्यायालय ने माना है कि यह स्थान भोजशाला का ही था, जहां राजा भोज ने मां वाग्देवी के माध्यम से इस स्थान की महत्ता को स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि  भविष्य में इस स्थान को और अधिक गौरवन्वित करेंगे और वाग्देवी की प्रतिमा को लाने का प्रबंध करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा क अयोध्या में राममंदिर पर  न्यायालय के निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द्रता की उत्कृष्ट मिसाल कायम की गई थी। उसी परंपरा का निर्वहन करने वाला मध्यप्रदेश ऐसा दूसरा स्थान बन सकता है, जब हम इस समाधान और न्यायालय के निर्णय के आधार पर हम निर्णय को स्वीकार कर आपसी भाईचारे का परिचय देते हुए इसे स्थायी समाधान बनाएं।
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राज भोज के काल में भोजशाला  का कैसा था स्वरूप?-परमार वंश के महान शासक राजा भोज जिनको ज्ञान, संस्कृति और शिक्षा के संरक्षक माना जाता हैं, उन्होंने 1034 ईस्वी के आसपास भोजशाला की स्थापना की थी। यह स्थान केवल पूजा का केंद्र नहीं था, बल्कि संस्कृत, वेद, व्याकरण, ज्योतिष, खगोल विज्ञान और भारतीय दर्शन के अध्ययन का प्रमुख विद्यापीठ था। भोजशाला भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्टों तथा उत्खननों में प्राप्त अवशेषों में संस्कृत व्याकरण शिलालेख, शिक्षण चक्र, संस्कृत श्लोक, नागाकार व्याकरण चित्र और मंदिर स्थापत्य के अवशेष प्राप्त हुए हैं। वैदिक अध्ययन से जुड़े इतने व्यापक प्रमाणों और साक्ष्य भोजशाला के हिंदू मंदिर होने की पुष्टि करते थी। उत्खननों में विष्णु प्रतिमा के अवशेष, मंदिर शैली के स्तंभ और प्राचीन धार्मिक संरचनाएँ भी प्राप्त हुईं, जो इसके हिंदू स्वरूप की ओर संकेत करती थी। अब हाईकोर्ट के निर्णय ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में भारत सरकार एवं एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

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