Atal Bihari Vajpai news : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन ने दावा किया कि भाजपा 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति और लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी। तब अटल जी ने उस प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि बहुमत के आधार पर उन्हें राष्ट्रपति बनाए जाने से एक गलत मिसाल कायम होगी।
अशोक टंडन ने अपनी पुस्तक अटल संस्मरण में इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने पार्टी के उस प्रस्ताव को साफ अस्वीकार कर दिया था। आडवाणी तब अटल के बाद पार्टी में दूसरे नंबर के नेता थे।
टंडन के मुताबिक वाजपेयी का मानना था कि किसी भी लोकप्रिय प्रधानमंत्री के लिए बहुमत के आधार पर राष्ट्रपति बनना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा उदाहरण नहीं होगा। इससे एक गलत मिसाल कायम होगी और वे इस तरह के कदम का समर्थन करने वाले अंतिम व्यक्ति होंगे।
टंडन ने पुस्तक में अटल-आडवाणी का जिक्र करते हुए लिखा है कि कुछ नीतिगत मतभेदों के बावजूद दोनों के रिश्ते में कभी कड़वाहट नहीं आई। आडवाणी हमेशा वाजपेयी को अपना नेता और प्रेरणा स्रोत मानते थे। वहीं, वाजपेयी आडवाणी को अपना दृढ़ साथी। दोनों की साझेदारी भारतीय राजनीति में सहयोग और संतुलन का प्रतीक रही।
अटल संस्मरण में 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया गया है। तब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं सोनिया गांधी ने वाजपेयी से फोन पर बात की थी। हमले के वक्त वाजपेयी अपने आवास पर थे और सहयोगियों के साथ टीवी पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई देख रहे थे।
गौरतलब है कि एपीजे अब्दुल कलाम 2002 में NDA और विपक्ष दोनों के समर्थन से 11वें राष्ट्रपति चुने गए थे। उन्होंने 2007 तक इस पद पर काम किया।
edited by : Nrapendra Gupta