Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन सख़्त रुख में दिखाई दे रहे हैं। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से विवाद के बाद अब मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा है, जिसमें उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि आप खुद को कैसे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।
खबरों के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन सख़्त रुख में दिखाई दे रहे हैं। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से विवाद के बाद अब मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा है, जिसमें उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि आप खुद को कैसे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। प्रदेश सरकार के गृह सचिव और मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से विवाद के दौरान अधिकारियों पर अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से मारपीट का भी आरोप लगा।
जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से ही मना कर दिया था और तब से ही वह अपने शिविर के बाहर विरोध में बैठे हैं। नोटिस में कहा गया है कि जब तक उच्चतम न्यायालय कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के संबंध में पारित नहीं करता है, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता है।
यह नोटिस माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद के लगाए गए शिविर के बोर्ड पर 'ज्योतिष पीठ शंकराचार्य' शब्द के प्रयोग को लेकर भेजा गया है। प्राधिकरण का कहना है कि शंकराचार्य पद से संबंधित मामला वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय में लंबित मामले की अवहेलना है।
Edited By : Chetan Gour