दूषित पानी से मासूम आव्यान की मौत के बाद मां साधना भी हॉस्पिटल में भर्ती, जानिए कैसी है हालत, क्या कहा डॉक्टरों ने?
साधना ने कहा- जो मेरे साथ हुआ वो किसी मां के साथ न हो
इंदौर में दूषित पानी से काल के गाल में समाए 6 महीने के आव्यान की मां साधना साहू को भी अपोलो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है। विजयनगर के अपोलो हॉस्पिटल में पिछले दो दिनों से उनका इलाज चल रहा है। बता दें कि दो तीन दिनों से उन्होंने उल्टी और बुखार की शिकायत हो रही थी। जिसके बाद उन्हें भर्ती कराया गया है।
वेबदुनिया ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर साधना और सुनील साहू से बात की। साधना ने बताया कि उन्हें उल्टी और बुखार की शिकायत हैं। जिसके बाद उन्हें यहां एडमिट किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं तो अपना बेटा खो चुकी हूं, लेकिन प्रशासन अब कम से कम इतनी व्यवस्था कर दे कि किसी और मां की कोख न उजड़े।
बेटे की मौत के बाद टूटा परिवार : उनके पति सुनील साहू ने बताया कि बेटे आव्यान की मौत के बाद साधना और वे पूरी तरह से टूट चुके हैं। घर में आव्यान के दादा और उनकी बेटी अकेले हैं और वे अस्पताल में पत्नी का इलाज करवा रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद पत्नी भी बीमार हो गई हैं, जिससे उनका पूरा परिवार अस्तव्यस्त हो गया है। हालांकि अब उनकी तबीयत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
दूषित पानी ने ली थी आव्यान की जान : बता दे कि ये वही साधना साहू हैं, जिनके 6 महीने के बेटे आव्यान ने दूषित पानी से हाल ही में दम तोड़ दिया था। इस खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है और यहां दूषित पानी से भागीरथ पूरा में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। जान गंवाने वालों में 6 महीने का आव्यान भी शामिल है, जिसकी मासूम तस्वीर देखकर हर कोई सिहर उठा था।
क्या कहा मां साधना ने : आव्यान की मां साधना ने बताया कि दो दिन पहले उन्हें भी उल्टी और बुखार की शिकायत हुई थी। जिसके बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में एडमिट किया गया है। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए वेबदुनिया को बताया कि बेटे की मौत से पूरा परिवार बिखर गया है। वे पूरी तरह से टूट चुके हैं। लेकिन अब यही प्रार्थना है कि जो उनके साथ हुआ है वो किसी भी मां के साथ न हो। किसी और मां की कोख सूनी न हो। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई कि सभी क्षेत्रों में पानी और सफाई की व्यवस्था चाक-चौबंद रखी जाए। ताकि कोई कम से कम दूषित पानी से न मरे। वो भी स्वच्छ इंदौर में।
प्रशासन शिकायत सुन लेता तो बेटा जिंदा होता : साधना और उनके पति सुनील ने बताया कि डेढ़ साल से मोहल्ले वालों की तरफ से नगर निगम इंदौर को शिकायत की जा रही थी।लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की, किसी ने आकर झांका भी नहीं। अगर अधिकारी समय रहते सुन लेते तो उनका बेटा आज जिन्दा होता। और इंदौर में इतने लोगों की मौत भी नहीं होती। यह नगर निगम और जिम्मेदार अफसरों की ही लापरवाही का नतीजा है कि इतने लोग मर गए और 150 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।
क्या कहा डॉक्टरों ने : अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि यहां साधना का इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अब उनकी हालत ठीक है, वे वार्ड में शिफ्ट कर दी गई है। बता दें कि शहर के अपोलो अस्पताल में दूषित पानी से बीमार हुए अब भी करीब 16 मरीज भर्ती हैं।
क्या दूषित पानी से हो सकती है मौत : दूषित पानी से लगातार हो रही मौत से इंदौर में बवाल मचा है। सवाल उठता है कि क्या दूषित पानी का संक्रमण इतना ज्यादा खतरनाक होता है कि उससे मरीज की मौत हो सकती है। इस बारे में बेवदुनिया ने अपोलो अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेट डॉ सुशील जैन से चर्चा की। उन्होंने बताया कि देखिए दूषित पानी से एक दम से दस्त लगते हैं उल्टियां होती है तो शरीर से पानी की कमी हो जाती है। यह एक्प्लोसिव डायरिया की वजह से होता है। इस पर यदि मरीज को साथ में कोई और भी बीमारी पहले से हो तो यह और संक्रमण मिलकर उसे गंभीर बीमार कर देता है। ऐसे में किडनी फेल होने की संभावना होती है। या डायलिसिस का सहारा लेना होता है। इसके साथ ही ओल्ड एज होना, या हार्ट की बीमारी होना आदि पहले से हो तो मरीज की मौत हो सकती है।
क्या पानी में कोई कैमिकल कम ज्यादा मात्रा में पाया गया : इस बारे में डॉक्टर जैन ने हमें बताया कि हम मरीज के इलाज के दौरान उसके दस्त के सैंपल लेते हैं, पानी के सैंपल हमारे पास नहीं होते हैं। इलाज में हम फोकस करते हैं कि जांच में कौनसे कीटाणू पाए गए हैं। किस तरह के कीटाणू में किस तरह के एंटीबायोटिक्स हमें देने चाहिए, यह सब ध्यान में रखते हुए इलाज करते हैं। चूंकि हमारे पास पानी का कोई सैंपल नहीं होता है, इसलिए हम नहीं बता सकते कि पानी को साफ करने के लिए कौनसा कैमिकल कितना कम या ज्यादा मात्रा में मिलाया जाता है।