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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा, शंकराचार्य के अपमान से हैं आहत, यूपी में खलबली

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हमें फॉलो करें alankar agnihotri Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri has resigned.

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, सोमवार, 26 जनवरी 2026 (16:21 IST)
Photo : social media
यूपी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुडा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर लगातार बहस और बयानबाजी जारी है। लेकिन अब जो खबर सामने आई है वो चौंकाने वाली है। दरअसल बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यूजीसी बिल और शंकराचार्य के साथ हुई घटना के विरोध में यह कदम उठाया है।

बता दें कि इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक..., काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री : 2016 बैच के पीसीएस ऑफिसर हैं। उनका कहना है कि वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई घटना से आहत हैं। बता दें कि जहां एक तरफ पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा है, वहीं मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है।

प्रशासनिक वर्ग में खलबली : अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर पूरे प्रदेश के प्रशासनिक वर्ग में खलबली मचा दी है। यह भी इस्तीफा इन्होंने 26 जनवरी जैसे मौके पर दिया है। अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना को लेकर अपना विरोध जताने को हर किसी को हैरत में डालने वाला तरीका अपनाया है। उन्होंने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पन्ने के अपने इस्तीफा में सबसे नीचे स्पष्ट लिखा है कि अब केंद्र एवं राज्य सरकार में न ही जनतंत्र है और न ही गणतंत्र है, बस भ्रमतंत्र है। देश में अब देशी सरकार नही विदेशी जनता पार्टी की सरकार है। उन्होंने यूजीसी बिल पर भी विरोध जताया है।

क्या लिखा है इस्तीफे में : अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं।

पत्र में आगे लिखा है कि प्रयागराज की घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का देशव्यापी अपमान किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा है कि प्रयागराज में हुई घटना एक चितंनीय एवं गंभीर विषय है और ऐसे प्रकरण इस सरकार में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है। इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है। अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि वह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून का विरोध भी किया। 
Edited By: Navin Rangiyal 

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