Publish Date: Wed, 03 Jun 2026 (13:13 IST)
Updated Date: Wed, 03 Jun 2026 (14:21 IST)
जल शक्ति मंत्रालय और अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने देश में जल संसाधन प्रबंधन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा यहां डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ISRO के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन ने कहा कि यह समझौता दोनों संगठनों के बीच सहयोग को गहरा करेगा और जल प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करेगा।\
जल शक्ति मंत्रालय और अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने देश में जल संसाधन प्रबंधन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा यहां डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
जल अनुसंधान एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में सरकार, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स से जुड़े 500 से अधिक हितधारकों ने भारत के जल अनुसंधान एवं नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया ताकि जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल व्यवस्था प्राप्त की जा सके।
कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जल शक्ति मंत्रालय के राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी, अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष तथा एएनआरएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. वी. नारायणन, वरिष्ठ सचिव, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और देशभर के उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) जलाशय निगरानी, जल-प्रसार आकलन, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता आकलन और जल निकायों में मैक्रोप्लास्टिक वितरण पर अध्ययन सहित 24 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करेंगे।
ISRO के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन ने कहा कि यह समझौता दोनों संगठनों के बीच सहयोग को गहरा करेगा और जल प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करेगा। नारायणन ने कहा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आज जल संसाधनों के अवलोकन, मूल्यांकन, पूर्वानुमान और प्रबंधन के लिए अभूतपूर्व क्षमता प्रदान करती है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि जल क्षेत्र में 315 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समर्थित 113 परियोजनाएं शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की सफलता का भी उल्लेख किया। इसके अंतर्गत देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की स्थापना की गई है।
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार विभाग के सचिव वीएल कंथा राव ने इस बात पर जोर दिया कि जल एक रणनीतिक संसाधन है जिसके लिए अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने पेयजल सुरक्षा, भूजल प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, नदी स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन के क्षेत्र में अत्याधुनिक समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया।
Edited By : Chetan Gour
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