Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 (13:39 IST)
Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 (13:49 IST)
Submarine Warfare: दुनिया की नजरें इस वक्त पश्चिम एशिया, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव पर टिकी हैं। लेकिन कूटनीति और युद्ध कौशल का पुराना नियम है— 'दुश्मन वहीं वार करता है जहां आपका ध्यान नहीं होता।' बीजिंग इसी रणनीति पर चलते हुए चुपचाप भारत के समुद्री पिछवाड़े (Backyard) यानी हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी सैन्य और सामरिक पकड़ मजबूत कर रहा है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने अपने तीसरे 'अनुसंधान' पोत को भारतीय जलक्षेत्र के करीब तैनात कर दिया है। एक रक्षा विशेषज्ञ के नजरिए से देखें तो यह केवल समुद्री शोध नहीं, बल्कि भविष्य के जलमग्न युद्ध (Undersea Warfare) की तैयारी है।
शी यान 6 : माले बना चीन का नया 'गंतव्य'
चीन का नवीनतम जासूसी जहाज, शी यान 6 (Shi Yan 6), सुंडा जलडमरूमध्य के कठिन रास्ते से होता हुआ हिंद महासागर में दाखिल हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इसका घोषित गंतव्य मालदीव की राजधानी माले है। विशेषज्ञों के मुताबिक मालदीव में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद माले का चीनी जहाजों के लिए 'पोर्ट ऑफ कॉल' बनना भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए एक 'रेड फ्लैग' है। यह क्षेत्र सीधे तौर पर भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी सीमा में आता है।
तीन मोर्चों पर घेराबंदी : दा यांग सीरीज का खेल
हिंद महासागर में अब चीन का एक छोटा लेकिन घातक बेड़ा सक्रिय है:
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दा यांग हाओ : फरवरी से सक्रिय, वर्तमान में अफ्रीका के करीब।
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दा यांग यी हाओ : दिसंबर से भारत, पाकिस्तान और अफ्रीकी तट के बीच निरंतर गश्त पर।
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शी यान 6 : ताजा प्रविष्टि, जो मालदीव के पास तैनात है।
वैज्ञानिक शोध या पनडुब्बी युद्ध की तैयारी?
कागजों पर ये जहाज 'सिविलियन' हैं, लेकिन इनकी क्षमताएं किसी युद्धपोत से कम नहीं हैं। रक्षा योजनाकारों के लिए चिंता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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मैपिंग का दोहरा उपयोग : 'शी यान' श्रेणी के जहाज समुद्र तल की विस्तृत मैपिंग करते हैं। यह डेटा पनडुब्बियों के लिए 'नेविगेशन कॉरिडोर' और छिपने के लिए 'ब्लाइंड ज़ोन' की पहचान करने में काम आता है।
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सब-सरफेस डेटा : 'दा यांग' श्रेणी के जहाज समुद्र की गहराई में ड्रिलिंग और खनिजों के बहाने पानी के तापमान, लवणता (Salinity) और ध्वनि की गति का डेटा जुटाते हैं।
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सोनार का जाल : पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) में सफलता इसी डेटा पर निर्भर करती है कि पानी के नीचे सोनार कितनी दूर तक देख पाएगा।
चीन बनाम भारत : एक गहरी खाई
वर्तमान में चीन के पास लगभग 50 अनुसंधान जहाज हैं, जो प्रशांत और हिंद महासागर में फैले हुए हैं। इसके मुकाबले भारत के पास केवल 10 से 12 ऐसे जहाज हैं, जो मुख्य रूप से नागरिक निकायों (जैसे NIO) द्वारा संचालित हैं। चीन का 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' मॉडल इन जहाजों को सीधे उसकी नौसेना (PLAN) से जोड़ता है।
भारत अब इस अंतर को पाटने के लिए 'मत्स्य 6000' जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जो 6000 मीटर की गहराई तक जाकर चीन की गतिविधियों को टक्कर दे सकेगी।
हंबनटोटा से लेकर माले तक, चीन की यह 'मोतियों की माला' (String of Pearls) अब सक्रिय सैन्य चुनौती में बदल रही है। भारत को न केवल अपनी निगरानी बढ़ानी होगी, बल्कि हिंद महासागर में अपने साझेदारों (फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) के साथ मिलकर एक मजबूत रक्षा कवच तैयार करना होगा।
वेबदुनिया न्यूज डेस्क
Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 (13:39 IST)
Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 (13:49 IST)