Parliament news in Hindi : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में जी राम जी बिल पेश किया। बिल पेश करते हुए शिवराज ने कहा कि गांधी जी खुद राम राज की बात करते थे। बापू हमारे दिल में बसते हैं। कांग्रेस ने बिल पर सदन में जोरदार हंगामा किया। बिल का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि हर योजना का नाम बदलने की सरकार की सनक हमें समझ नहीं आती। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
प्रियंका ने कहा, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) पिछले 20 साल से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह ऐसा क्रांतिकारी कानून है कि जब इसको बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने इससे सहमति जताई। इसके द्वारा गरीब से गरीब लोगों को 100 दिन का रोजगार मिलता है। जब हम अपने क्षेत्रों में जाते हैं, तो दूर से ही दिख जाता है कि कौन से लोग मनरेगा के मजदूर हैं। उनके चेहरे पर झुर्रियां होती हैं और हाथ पत्थर के हो चुके होते हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत हमारे गरीब-भाई बहनों को रोजगार की जो कानूनी गारंटी मिलती है, वह इस योजना में मांग के आधार पर संचालित होती है। मतलब जहां रोजगार की मांग है, वहां इस योजना के द्वारा 100 दिनों का रोजगार देना अनिवार्य है। इसके साथ ही केंद्र से इसके लिए जो पूंजी जाती है, वह भी जमीनी स्तर की मांग पर आधारित होती है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस विधेयक में केंद्र को यह अनुमति दी गई है कि वह पहले से निर्धारित कर ले कि कितनी पूंजी किस राज्य को भेजी जाएगी। इससे संविधान के 73वें संविधान संशोधन को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके जरिए ग्राम सभाओं को जमीनी परिस्थितियों के आधार पर यह तय करने का पूरा अधिकार दिया जाता था, जिन्हें आज कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे संविधान की मूल भावना है कि हर एक व्यक्ति के हाथ में ताकत होनी चाहिए। वही मूल भावना पंचायती राज में है और यह अधिनियम उसी मूल भावना का विरोध कर रहा है। इस विधेयक के प्रबंधन से रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है, जो हमारे संविधान के विपरीत है।
प्रियंका ने कहा कि मनरेगा में 90% अनुदान केंद्र से आता था, लेकिन इस विधेयक में ज्यादातर प्रदेशों में अब 60% अनुदान ही आएगा। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत भार पड़ेगा। ये उन प्रदेशों को और प्रभावित करेगा जिनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही केंद्र की GST के बकाया का इंतजार कर रही है। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जारी जा रही है। ये विधेयक काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात करता है, लेकिन इसमें मज़दूरी बढ़ाने की कोई बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि हर योजना का नाम बदलने की सरकार की सनक हमें समझ नहीं आती। जब-जब ऐसा किया जाता है, तब केंद्र को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। बिना चर्चा और सदन की सलाह लिए इस विधेयक को पास नहीं किया जाना चाहिए। यह विधेयक वापस लिया जाना चाहिए, इसके बदले एक नया विधेयक पास किया जाना चाहिए। गहन जांच और व्यापक चर्चा के लिए यह बिल संसद की स्थायी समिति को भेजा जाए। कोई विधेयक किसी की निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रहों के आधार पर न तो पेश होना चाहिए और न ही पास होना चाहिए।
edited by : Nrapendra Gupta