उत्तरप्रदेश के बहराइच में पुलिस रंगरूटों द्वारा एक कथावाचक को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर देने का वीडियो वायरल होने के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संवैधानिक उल्लंघन के आरोपों के बीच राज्य के डीजीपी राजीव कृष्णा ने संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं इसे लेकर अपनी तरफ से पक्ष भी रखा गया है।
नमिता बाजपेयी के अनुसार यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है कि यह स्पष्ट किया गया है कि पुलिस परेड ग्राउंड का उपयोग निर्धारित मानदंडों के अनुसार सख्ती से केवल पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासन और आधिकारिक समारोहों के लिए किया जाना चाहिए। इन निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन को देखते हुए, संबंधित पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
गोस्वामी का प्रवचन उपयोगी था : इस बीच बहराइच पुलिस ने इस आयोजन के पीछे का तर्क देते हुए कहा कि आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को रंगरूटों की काउंसलिंग, ध्यान और योग कार्यशाला के लिए आमंत्रित किया गया था। पुलिस का दावा है कि प्रशिक्षण के दौरान अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण 28 रंगरूटों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। अधिकारियों ने दावा किया कि गोस्वामी का प्रवचन “उपयोगी” रहा और इससे रंगरूटों का तनाव दूर हुआ और कर्तव्य के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
क्या है पूरा मामला : वायरल वीडियो में कथित तौर पर दिख रहा है कि बहराइच के पुलिस अधीक्षक आरएन सिंह और अन्य पुलिसकर्मी रेड कारपेट बिछाकर पुंडरीक गोस्वामी का स्वागत कर रहे हैं। वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि गोस्वामी रंगरूटों से सलामी स्वीकार कर रहे हैं और एसपी उनके बगल में खड़े हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध और माफिया राज फल-फूल रहा है, जबकि सरकार सलामी के खेल में व्यस्त है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई इस मामले का संज्ञान लेगा। वहीं, सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना को संविधान पर हमला बताते हुए कहा, “सलामी और परेड संप्रभुता के प्रतीक हैं,” और इनका उपयोग इस तरह नहीं किया जाना चाहिए।
Edited By: Navin Rangiyal