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शीशमहल तो याद है ना? एक लाख से ज्यादा की आलीशान कुर्सी पर विराजती हैं CM रेखा गुप्ता

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Delhi CM Rekha Gupta
CM Rekha Gupta Chair Controversy: रामचरितमानस की एक चौपाई है 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे'... अर्थात दूसरों को उपदेश या सलाह देना बहुत आसान बात है, लेकिन जब खुद पर आती है तो व्यक्ति अपने ही उपदेशों को भूल जाता है। कभी 'शीशमहल' को लेकर दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधने वाली भाजपा और रेखा गुप्ता अब स्वयं आलोचकों के निशाने पर आ गई हैं। दरअसल, अब मुख्‍यमंत्री गुप्ता की कुर्सी काफी सुर्खियों में हैं। उनकी कुर्सी की कीमत एक लाख रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।
 
Question_The_System नामक एक एक्स हैंडल से पोस्ट की गई है। इसमें लिखा है- दिल्ली में पानी की किल्लत है, लेकिन VIP लोगों की ऐशो-आराम कभी खत्म नहीं होती। खबरों के मुताबिक, रेखा गुप्ता को 1.10 लाख रुपए तक की कीमत वाली कुर्सी इस्तेमाल करते देखा गया। इस कुर्सी की खासियत यह है कि इसमें मसाज, रिक्लाइनर, फुटरेस्ट और बेहतरीन आराम देने वाली सुविधाएं मौजूद हैं। वहीं, एक आम ऑफिस कुर्सी की कीमत 10,000 रुपए से भी कम होती है। प्राथमिकताएं मायने रखती हैं। हालांकि कुछ सूत्र इस कुर्सी की कीमत और अधिक बता रहे हैं। हालांकि वेबदुनिया इस पोस्ट की दी गई कुर्सी की कीमत की पुष्टि नहीं करता। 

क्यों शुरू हुआ विवाद?

दरअसल, यह विवाद इसलिए भी सामने आया है कि जनता को 'कम खर्च' और 'इलेक्ट्रिक कार' की सलाह देने वालीं Rekha Gupta खुद 1.10 लाख रुपए की लग्जरी कुर्सी पर आराम फरमा रही हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इस कुर्सी में जीरो ग्रेविटी, मसाज की सुविधा है साथ ही प्रीमियम लेदर लगा हुआ है। दूसरी ओर, दिल्ली पानी के लिए तरस रही है और यहां फुल कम्फर्ट जोन चल रहा है। मुख्यमंत्री गुप्ता की यह तस्वीर वायरल हो रही है और लोग सवाल कर रहे हैं कि इतनी महंगी चेयर पर बैठीं हैं।

क्या है दिल्ली का शीशमहल विवाद?

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की राजनीति में 'शीशमहल प्रकरण' आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक सरकारी आवास के पुनर्निर्माण (Renovation) से जुड़ा एक बेहद चर्चित और गरमाया हुआ राजनीतिक विवाद है। विपक्षी पार्टी भाजपा (BJP) ने केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित '6 फ्लैगस्टाफ रोड' वाले बंगले को 'शीशमहल' का नाम दिया था।
 
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री आवास के रेनोवेशन पर खर्च की गई भारी-भरकम राशि और उसमें बरती गई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि कोरोना महामारी के दौर (2020 से 2022 के बीच) में जब दिल्ली की जनता संकट में थी, तब मुख्यमंत्री आवास को बेहद आलीशान बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। इसका खर्च बढ़कर आधिकारिक तौर पर लगभग 33.86 करोड़ रुपए (और कुछ दावों के अनुसार कुल साजो-सामान मिलाकर 45 से 80 करोड़ रुपये तक) पहुंच गया था। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

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