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क्या इंद्रप्रस्थ होगा दिल्ली का नाम, भाजपा सांसद की चिट्टी से गरमाई सियासत

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BJP MP Delhi Name Change Proposal
Delhi Name Change Proposal : भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने का अनुरोध किया है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ कर दिया जाएगा।
 
खंडेलवाल ने अपने पत्र में लिखा है, दिल्ली नाम शहर की गहरी और ज्यादा पुरानी विरासत के बजाय एक सीमित ऐतिहासिक समय को दिखाता है। इसलिए इंद्रप्रस्थ नाम को फिर से रखने से मॉडर्न भारत की राजधानी अपनी पुरानी सभ्यता की नींव से फिर से जुड़ जाएगी। यह इस बात का प्रतीक होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सीट इंसानियत की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक की विरासत पर खड़ी है।

इंद्र के नाम पर रखा गया इंद्रप्रस्थ नाम

इंद्रप्रस्थ का नाम भगवान इंद्र पर रखा गया, क्योंकि इस नगर को इंद्र के स्वर्ग की तरह बसाया गया था। भगवान कृष्ण ने विश्वकर्मा से भगवान इंद्र के स्वर्ग के समान एक महान शहर का निर्माण करने के लिए कहा था। विश्वकर्मा ने इस नगर में दिव्य और सुन्दर उद्यान और मार्गों का निर्माण किया था, तो मयासुर ने इस राज्य में मयसभा नामक भ्रमित करने वाला एक भव्य महल बनाया था।

इंद्रप्रस्थ का पांडवों से संबंध

गौरतलब है कि आज का दिल्ली ही प्राचीनकाल का इंद्रप्रस्थ था। यमुना नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र हस्तिनापुर (मेरठ) के अंतर्गत आता था। इसे पांडवों ने बसाया था। जब पांडवों को वनवास हुआ तो उन्हें इंद्रप्रस्थ छोड़कर जाना पड़ा। इस दौरान इंद्रप्रस्थ उजाड़ सा हो गया था। 
 
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के अपने धाम चले जाने के बाद अर्जुन उनके कुल के बचे एक मात्र व्यक्ति वज्र को इन्द्रप्रस्थ का राजा बना दिया था। वज्र वहां उजाड़ क्षेत्र में कुछ समय तक रहने के बाद मथुरा आ गए और वहीं उन्होंने अपने राज्य का विस्तार किया। वज्र के कारण ही मथुरा, वृंदावन आदि क्षेत्र को वज्रमंडल कहा जाता है।

पुराना किला सबूत 

दिल्ली में पुराना किला इस बात का सबूत है। खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर पुरातत्वविदों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि पांडवों की राजधानी इसी स्थल पर रही होगी। यहां खुदाई में ऐसे बर्तनों के अवशेष मिले हैं, जो महाभारत से जुड़े अन्य स्थानों पर भी मिले हैं। दिल्ली में स्थित सारवल गांव से 1328 ईस्वी का संस्कृत का एक अभिलेख प्राप्त हुआ है। यह अभिलेख लाल किले के संग्रहालय में मौजूद है। इस अभिलेख में इस गांव के इंद्रप्रस्थ जिले में स्थित होने का उल्लेख है।

गौरतलब है कि मोदी मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ही केरल का नाम केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ममता बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला' करने की मांग की है। उनका प्रस्ताव केंद्र ने वर्षों से लंबित रखा है।
edited by : Nrapendra Gupta 

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