Publish Date: Fri, 15 May 2026 (16:17 IST)
Updated Date: Fri, 15 May 2026 (16:28 IST)
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है। भोजशाला परिसर में एएसआई का संरक्षण जारी रहेगा। मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है। अदालत ने परिसर को सरस्वती मंदिर करार देते हुए यहां मुसलमानों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी।
ओवैसी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसमें सुधार करेगा और इस आदेश को पलट देगा।
बाबरी मस्जिद के फैसले के साथ इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।
खुश हुआ हिंदू पक्ष
फैसले को सुनकर हिंदू पक्ष में हर्ष की लहर फैल गई। हिंदू पक्ष को उम्मीद थी कि फैसला उनके पक्ष में ही आएगा। भोज उत्सव समिति के सदस्य ने अदालत के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे हिंदू समाज के वर्षों पुराने संघर्ष की जीत बताया।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार भी दिया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे अपना एक प्रत्यावेदन सरकार को दें। सरकार इस पर विचार करेगी कि उन्हें धार में एक वैकल्पिक भूमि दी जाए। एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। यहां अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
edited by : Nrapendra Gupta
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