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आज से गुजरात सहित पूरे देश में डिजिटल जनगणना शुरू, जानें कौन से 4 नए सवाल पूछे जाएंगे?

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Digital Census
गुजरात सहित पूरे देश में आज यानी 1 जून 2026 से 'जनगणना-2027' के पहले चरण की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। यह देश की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है, जिसे इतिहास में पहली बार पूरी तरह से डिजिटल माध्यम (एप्लिकेशन के जरिए) से किया जा रहा है। राज्य के जनगणना निदेशक सुजल जे. मयात्रा ने इस महाअभियान में सक्रिय रूप से भाग लेकर देश के सभी नागरिकों से सही विवरण दर्ज कराने का विशेष अनुरोध किया है।

लाख से अधिक स्टाफ की विशाल फौज मैदान में
इस राष्ट्रीय कार्य को सफल बनाने के लिए पूरे गुजरात में 1,10,598 हाउसलिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) तैयार किए गए हैं। इसमें 1,09,038 प्रशिक्षित प्रगणक (न्यूमरेटर) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे और उनके काम पर नजर रखने के लिए 18,254 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। इन सभी कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग चरणों में गहन प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है।

दो मुख्य चरण और प्रश्नों की संख्या
पूरी जनगणना प्रक्रिया को दो महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण 1 जून से 30 जून, 2026 तक चलेगा, जिसमें प्रगणकों द्वारा मकानों की स्थिति और भौतिक सुविधाओं से संबंधित कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। जबकि दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी, 2027 के दौरान आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्य जनगणना के साथ-साथ देश के इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर ‘जाति जनगणना’ का काम भी संयुक्त रूप से पूरा किया जाएगा।

पहली बार पूछे जाने वाले चार नए सवाल
इस बार की डिजिटल जनगणना में आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए पहली बार चार नए सवालों को शामिल किया गया है। घर पर आने वाले कर्मचारियों द्वारा परिवार के मुखिया से पूछा जाएगा कि— क्या आप इंटरनेट का उपयोग करते हैं? क्या आपके पास स्मार्टफोन है? क्या आप पीने के लिए बोतलबंद पानी (कैने या बोतल का पानी) मंगवाते हैं? और आप मुख्य अनाज के रूप में किस धान्य (अनाज) का सबसे अधिक उपयोग करते हैं? इन चार बातों का डेटा देश में पहली बार एकत्र किया जाएगा।

सावधान: ये तीन निजी जानकारियां कभी न दें
जनगणना के नियमों के अनुसार नागरिकों की सुरक्षा के लिए कुछ बातें स्पष्ट की गई हैं। यदि कोई कर्मचारी आपसे आपकी मासिक आय या बैंक बैलेंस पूछता है, पहचान के दस्तावेज दिखाने का दबाव बनाता है, या बैंक खाता नंबर और ओटीपी (OTP) जैसी अत्यंत गोपनीय जानकारी मांगता है, तो नागरिकों को ऐसी कोई भी जानकारी देने से साफ मना कर देना चाहिए।

सख्त कानून और जानकारी की गोपनीयता
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, जनगणना के दौरान एकत्र की जाने वाली सभी व्यक्तिगत जानकारियां 'जनगणना अधिनियम-1948' के तहत पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएंगी। इस डेटा का उपयोग कभी भी अदालत या कराधान (टैक्स) की कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में नहीं किया जाएगा। हालांकि, कानून के अनुसार हर नागरिक के लिए सही जानकारी देना अनिवार्य है; यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देगा या विवरण देने से इनकार करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है।

16 भाषाओं और ऑफलाइन टेक्नोलॉजी का संगम
इस डिजिटल अभियान के लिए एंड्रॉइड और आईओएस (iOS) प्लेटफॉर्म पर एक विशेष एप्लिकेशन तैयार की गई है, जो गुजराती सहित देश की कुल 16 आधिकारिक भाषाओं को सपोर्ट करती है। इस तकनीक की खासियत यह है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट नेटवर्क नहीं है, वहां भी प्रगणक बिना इंटरनेट के 'ऑफलाइन' मोड में डेटा सुरक्षित कर सकेंगे और नेटवर्क मिलते ही डेटा स्वचालित रूप से सर्वर पर अपलोड हो जाएगा।

लिव-इन और रसोई के बदले नियम
नए नियमों के अनुसार, सामाजिक और भौतिक स्थिति की परिभाषा में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह रहा है, तो जनगणना में उन्हें ‘विवाहित जोड़ा’ ही माना जाएगा। इसके अलावा, यदि घर के एक ही कमरे के हिस्से में खाना पकाया जाता है और वहीं सोया जाता है, तो उसे अलग ‘रसोई’ नहीं माना जाएगा; रसोई के लिए अलग कमरा होना अनिवार्य है।

वाहन, रेडियो और टीवी की नई परिभाषा
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वाहनों के पंजीकरण के लिए भी सटीक मानदंड तय किए गए हैं। यदि आपके मोबाइल में एफएम (FM) की सुविधा है, तो माना जाएगा कि आपके पास ‘रेडियो’ है। हालांकि, मोबाइल पर यूट्यूब देखना ‘टीवी’ नहीं माना जाएगा, इसके लिए घर में टेलीविजन सेट होना जरूरी है। वाहनों की बात करें तो ट्रैक्टर को कार की श्रेणी में और ई-रिक्शा या ऑटो को बाइक की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।

सेल्फ सर्टिफिकेशन और आधिकारिक हेल्पलाइन
गुजरात में गत 17 मई से शुरू किए गए ऑनलाइन ‘स्व-जनगणना’ (Self-Enumeration) अभियान को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों सहित लगभग 3.74 लाख से अधिक जागरूक नागरिकों ने पोर्टल पर खुद ही फॉर्म भर दिए हैं। नागरिक अपनी किसी भी उलझन, प्रश्न या सत्यापन के लिए आधिकारिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं या censusindia.gov.in पोर्टल पर जा सकते हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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