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घर में डिजिटल लॉक और लोहे की जाली बनी 'काल', इंदौर के पुगलिया परिवार के 8 सदस्यों की जिंदा जलकर मौत

पड़ोसियों ने की मदद की नाकाम कोशिशें, 'डिजिटल लॉक' में दम तोड़ता रहा पुगलिया परिवार, इंदौर में रूह कंपा देने वाली दास्तां

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Indore Fire Tragedy
Indore Fire Tragedy : इंदौर के ब्रजेश्वरी एनेक्स में स्‍थित पुगलिया परिवार के घर में हुए इलेक्‍ट्रिक कार हादसे में 8 लोगों की बेहद दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में मनोज पुगलिया परिवार की गर्भवती बहू सिमरन समेत 3 बच्‍चों की भी मौत हुई है। मृतकों में 3 बच्‍चे, तीन महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। वहीं 4 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लोगों ने मदद की नाकाम कोशिशें की। क्‍योंकि घर आग की भट्टी बन चुका था। इस पर डिजिटल लॉक जाली से कवर की गई बालकनी में मदद नहीं पहुंच सकी।

अभी तक की पुलिस की जांच में जो सामने आया उसमें घर के नीचे चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार (टाटा पंच) में शॉर्ट सर्किट से आग लगना वजह बनी है। घटना बुधवार सुबह 4 बजे की है। कार के ठीक पास में इलेक्‍ट्रिक पोल था, जिसकी वजह से आग वायरिंग से होकर दूसरी और तीसरी मंजिल तक आग ने पूरे घर को चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से पसरी कि पूरा घर जलती हुई भट्टी बन गया। घटना के बाद घर में से 6 -7 एलपीजी सिलेंडर भी बरामद किए गए हैं। इनमें एक एक या दो सिलेंडर के फटने की भी आशंका है।
  • घर की सुरक्षा के लिए किए गए 'जालीदार इंतजाम' और डिजिटल लॉक
  • पैक घर की वजह से ठीक से नहीं हो सका बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन
  • 23 जनवरी को मनोज जैन के बेटे की हुई थी शादी, छोटी बहू मायके होने से बच गई
  • मृतकों में 3 बच्‍चे, गर्भवती बहू समेत 3 महिलाएं दो पुरुष शामिल 
  • घर में रखी कार, फ्रीज, एसी और जिम पूरी तरह से जलकर हुए खाक
  • घर का एक हिस्‍सा पूरी तरह से जलकर हुआ खाक 
  • पडोसियों ने की बचाने की नाकाम कोशिशें, आग की भट्टी बन गया था घर
मौके पर मौजूद सीएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि 8 मौतें हुई हैं। प्राथमिक जांच में इवी कार से आग लगने का कारण सामने आया है। मृतकों में महिलाएं, बच्‍चे और पुगलिया परिवार के रिश्‍तेदार भी शामिल हैं। पुलिस ने जांच शुरू की है। पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद पूरी डिटेल सामने आ सकेगी।
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छोटी बहू अभी मायके में हैं तो बच गई : पड़ोसी ने बताया कि आग लगने के बाद घर से चार लोग तुरंत बाहर निकल गए। वहीं, अन्य लोग फंस गए। घर के अंदर जो लोग फंसे थे, उनमें तीन बच्चे थे। आठों की मौत हो गई है। हमलोगों ने खिड़की के शीशे तोड़े लेकिन उन सबों को बचा नहीं पाए। फायर ब्रिगेड ने भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि 23 जनवरी को बेटे की शादी हुई थी। छोटी बहू अभी मायके गई हुई थी। मनोज जैन पुगलिया के साले आए हुए थे। उनकी भी मौत हो गई है।

बंगले में अति सुरक्षा बना मौत की वजह : घटना के बाद पुगलिया परिवार के घर की जो हालत नजर आई वो भयावह थी। कौने पर स्‍थित तीन मंजिला इस मकान में मुख्‍य द्वार पर लोहे का एक हैवी गेट है। दूसरी मंजिल पर बालकनी को चारों तरफ से सुरक्षा के लिहाज जाली से पैक किया था। इस जाली की वजह से फायर ब्रिगेड का पानी घर में उस फोर्स से नहीं जा सका। अगर पानी अंदर तक जाता तो हो सकता है कि कुछ लोगों को बचाया जा सकता था।
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डिजिटल लॉक से नहीं निकल पाए बाहर : इसके अलावा घर में डिजिटल लॉक भी थे। इसी वजह से जब आग लगी तो घर में सो रहे सदस्‍य बाहर नहीं निकल पाए। हालांकि पोस्‍टमार्टम के बाद पता चल सकेगा कि सभी 8 लोगों में से कितने लोगों की जलने और कितनों की दम घुटने से मौत हुई। हालांकि रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन टीम को घर में घुसने के लिए आसपास लगी जाली को काटना पड़ा। इस हिसाब से आशंका है कि ज्‍यादातर लोगों की मौत झुलसने की वजह से हुई होगी।
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कार- एसी कंप्रेशर और फ्रीज फटने की आवाजें : ब्रजेश्वरी एनेक्स के इस घर के आसपास रहने वाले पड़ोंसियों ने वेबदुनिया को बताया कि सुबह 4 से सवा 4 के आसपास शॉर्ट सर्किट की आवजों के साथ कुछ दूसरे विस्‍फोट की आवाजें भी सुनाई दी। इनमें कार की बैटरी, एसी के कंप्रेशर और फ्रीज फटने की आवाजें हैं। घर में 7-8 सिलेंडर भी रखे थे, हालांकि एक या दो ही सिलेंडर फटे हैं, बाकी सब खाली थे। बता दें कि मनोज पुगलिया रबर कारोबारी थे। अनुमान है कि घर में रबर सबंधी भी कोई मटैरियल रखा हो। घर में पीएनजी गैस कनेक्‍शन की लाइन भी है, हालांकि लाइन ने आग नहीं पकड़ी, अन्‍यथा इससे भी बड़ा हादसा होता और आसपास के घरों को भी चपेट में ले सकता था।

40 मिनट बाद पहुंचा फायर ब्रिगेड : इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि घटना के बाद जब लोगों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को कॉल किया तो फायर ब्रिगेड करीब 40 मिनट देरी से पहुंची। हालांकि तिलक नगर पुलिस 10 मिनट में मौके पर पहुंच गई थी। रहवासियों ने बताया कि उसमें भी पहला टैंकर खाली होने के बाद दूसरा टैंकर मंगाया गया। इसमें भी समय लग गया।

बाल्‍टी से पानी डाला, बच जाती कुछ लोगों की जान : पड़ोसियों का कहना है कि अगर समय पर फायर ब्रिगेड आ जाती तो कुछ लोगों को बचाया जा सकता था। घटना के बाद करीब आधे घंटे तक पड़ोसी बाल्टियों से पानी डालते रहे, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि कुछ नहीं हो सका। घर आग की भट्टी बन चुका था, उसकी लपट की वजह से वहां खडे रहना भी संभव नहीं था। प्रत्‍यक्षदर्शी लोगों ने बताया कि जैसे ही आग लगी सबसे पहले घर के मालिक मनोज पुगलिया जागे और कमरे से बाहर भागे। इसके बाद वे वापस अंदर गए और किसी को बाहर लाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी ज्यादा थी कि न तो वे खुद बाहर निकल सके और न ही किसी को बचा सके।
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तिलक नगर थाना प्रभारी मनीष लोधा ने बताया कि कुल आठ लोगों की मौत हुई है। इनमें 3 बच्चे, 3 महिलाएं और 2 पुरुष हैं। उन्‍होंने बताया कि 3 लोग घायल हुए हैं। पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि सभी लोगों की मौत झुलसने से हुई है या दम घुटने से। मृतकों में मनोज पुगलिया के साथ ही विजय सेठिया, छोटू सेठिया, सुमन, सिमरन, राशि सेठिया और टीनू समेत 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे में सौरभ पुगलिया, आशीष और हर्षित घायल हुए हैं। इनका अस्‍पताल में इलाज चल रहा है। मरने वालों में इनके बाहर से आए रिश्‍तेदार भी हैं।
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क्‍या कहा स्‍थानीय पार्षद ने : यहां के स्‍थानीय पार्षद राजीव जैन ने बताया कि घर की गैलरी में जाली लगी होने की वजह से पानी पूरी फोर्स के साथ नहीं जा सका। पानी जाली से टकराकर वापस बाहर आ रहा था। पूरा घर पैक था। एक सिलेंडर के फटने की भी आवाज़ लोगों को आई थी। हालांकि बाकी सिलेंडर सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह सही बात है कि फायर ब्रिगेड देरी से पहुंचा, लेकिन गालियां छोटी होने की वजह से भी ऐसा हुआ। छोटी गलियों के लिए फायर ब्रिगेड के पास छोटे वाहन होना चाहिए। इससे भी घटना स्थल पर पहुंचने में देर लगती है।


फोटो और वीडियो : धर्मेंद्र सांगले

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