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भागीरथपुरा त्रासदी एक तंत्र निर्मित आपदा, वेबदुनिया से बोले जलपुरुष राजेंद्र सिंह, भूजल दूषित होने से बढ़ी चुनौतियां

वेबदुनिया की जलपुरुष राजेंद्र सिंह से EXCLUSIVE बातचीत

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विकास सिंह

, सोमवार, 5 जनवरी 2026 (16:20 IST)
इंदौर के भागीरथपुरा में एक और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे है। इस बीच प्रभावित क्षेत्र में भूजल के दूषित होने से अब प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है। ऐहतियातन प्रशासन ने 400 से अधिक निजी और 100 से अधिक सरकारी बोरिंग पर बैन लगा दिए है और क्षेत्र में पानी की सैंपंलिंग कर उसकी जांच की जा रही है।  

इंदौर में पहले दूषित पानी से मौते और अब भूजल के दूषित होने से प्रशासन के सामने क्या चुनौतियां और इन चुनौतियों के कैसे निपटा जा सकता है, इसको लेकर वेबदुनिया के पॉलिटिक्ल एडिटर विकास सिंह ने रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जलपुरुष राजेंद्र सिंह से तमाम मुद्दों पर खास बातचीत की।  

‘वेबदुनिया’ से बातीचत में ‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह कहते हैं कि इंदौर 8 साल से स्वच्छता में नंबर वन आ रहा था लेकिन  यह सफाई केवल ऊपरी तौर पर दिखावटी थी। सबसे स्वच्छ शहर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत एक मानव निर्मित आपदा है। एक तंत्र निर्मित आपदा जिसमें दोषपूर्ण सिस्टम ने इतने सारे लोगों की हत्याएं की और इतनी बड़ी संख्या मे लोग बीमार हुए है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मरने का कारण पाइपलाइन से आने वाले साफ पानी में गंदे पानी का मिलना है।

वहीं जल संरक्षण विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह कहते है कि अब वहां के लोग जब भूगर्भ जल रहे है तो वह भी प्रदूषित मिल रहा है। इंदौर में भूगर्भ जल के दूषित होने का बड़ा कारण इंदौर जैसे शहरों में लंबे समय से दूषित पानी और केमिकल वॉटर को बोर कर जमीन के अंदर पहुंचा देना है। अभी तक यह दूषित पानी कान्ह नदीं में बह ही रहा था। औद्योगिक और मानवीय गतिविधियों के कारण दूषित पानी और केमिकल युक्त वॉटर को बोर कर अंदर डालने से भूजल स्तर (Underground Aquifer) गंभीर रूप से दूषित हो गया है और उसे रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए, जिसके फलस्वरूप ऐसी परिस्थितियां निर्मित हुई है और आज आज भूजल ही दूषित हो गया।
जिसके परिणामस्वरूप आज ऐसी स्थिति दिखाई दे रहीहै। स्थिति इतनी भयावह है कि अब ज़मीन के नीचे का शुद्ध जल भंडार पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है, जिससे लोगों  को  साफ पानी नहीं मिल पा रहा है और उनके स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

भागीरथपुरा जैसी आपदा को भविष्य में रोकने के लिए सरकार को जल्द से जल्द प्रदूषित (सीवेज) पाइपलाइन को पीने के पानी की पाइप लाइन से एकदम अलग करना होगा अगर यह दोनों पाइप लाइन एक साथ बहेगी तो इस तरह की त्रासदी फिर कभी न कभी होगी। इसलिए इस सिस्टम को बदलने की जरूरत है। अगर दोनों ही पाइप लाइन अगर एक ही स्थान पर फ्लो करेगी तो भागीरथपुरा जैसी घटनाएं दोबारा होगी। दोबारा ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए पाइप लाइन का सिस्टम बदलना होगा।

भागीरथपुरा कांड पर राजेंद्र सिंह कहते है कि अगर देश के सबसे साफ शहर में ऐसी त्रासदी हो सकती है, तो समझा जा सकता है कि दूसरे शहरों में पेयजल आपूर्ति प्रणाली के हालात कितने गंभीर होंगे। वह कहते है कि पानी का निजीकरण और कॉर्मिशयल उपयोग के साथ पानी का बाजार बनाने के कारण ही इस तरह की घटनाएं होती है। 
‘वेबदुनिया’ से बातचीत में राजेंद्र सिंह कहते है कि अब वह समय आ गया है कि सरकार को राइट टू वॉटर एक्ट पर काम कर इसको मूर्त रूप देना चाहिए। अगर इस तरह कानून नहीं बनते है तो पानी का व्यापार ही बढ़ेगा। वह कहते है कि पानी का कम्युनिटी ड्रिवन डिसेंट्रलाइज्ड मैनेजमेंट होना चहिए तो इस तरह की घटनाएं नहीं होगी। इस तरह की घटनाएं जो सेंट्रलाइज (केंद्रीकृत) सिस्टम के काऱण होती है और इसमें दोषी लग बच जाते है और उनको पकड़ना और सजा देना इतना आसान काम नहीं रहता। डिसेंट्राइलइज सिस्टम में पहले तो ऐसी गलतियां होती नहीं है और अगर गलती हो गई तो जिसकी गलत होगी उसकी पहचान कर उसे पकड़ा जा सकेगा।

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