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बंगाल में SIR पर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने दी चेतावनी, बोले- खतरे में पड़ सकती है लोकतांत्रिक भागीदारी

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हमें फॉलो करें Amartya Sen's statement regarding SIR

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

कोलकाता , शनिवार, 24 जनवरी 2026 (17:44 IST)
Amartya Sen's statement regarding SIR : पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। इस बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंता जाहिर की है। सेन ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को जल्दबाजी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे लोकतांत्रिक भागीदारी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों पर भी समय का भारी दबाव दिखता है।

खबरों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। इस बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंता जाहिर की है। सेन ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को जल्दबाजी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे लोकतांत्रिक भागीदारी खतरे में पड़ सकती है।
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उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों पर भी समय का भारी दबाव दिखता है। सेन का कहना है कि एसआईआर की पूरी कवायद अनावश्यक जल्दबाजी में की जा रही है और इससे लोकतांत्रिक भागीदारी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब राज्य में कुछ ही महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं।

सेन ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण अपने आप में लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसके लिए सावधानी और पर्याप्त समय बेहद जरूरी है। अर्थशास्त्री सेन ने कहा कि यह अभ्यास 'बहुत जल्दबाजी' में किया जा रहा है और आने वाले विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक भागीदारी को खतरे में डाल सकता है।
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उन्होंने कहा कि बंगाल में यह प्रक्रिया कम समय और बिना उचित तैयारी के की जा रही है। सेन ने कहा, पूरी तरह से और सावधानीपूर्वक की गई मतदाता सूची की समीक्षा एक अच्छा लोकतांत्रिक तरीका हो सकता है। अर्थशास्त्री सेन ने आरोप लगाया कि लोगों को अपना मताधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे मतदाताओं के खिलाफ अन्याय और भारतीय लोकतंत्र के लिए अनुचित बताया।

अर्थशास्त्री ने बताया कि उनके मतदान अधिकार पर सवाल उठाने पर उन्हें अपनी मृत माता के जन्म तिथि और उम्र के बारे में पूछताछ करनी पड़ी, जबकि सभी विवरण पहले से चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में मौजूद थे। अमर्त्य सेन ने आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान करने की इच्छा जताते हुए कहा कि वे जरूर वोट डालना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके उनके निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की तारीख कब तय होती है। उन्होंने बताया कि हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर होने और ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज के पूर्व मास्टर होने के कारण उनकी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां भी हैं।
Edited By : Chetan Gour

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