भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान मचा हुआ है। ट्रेड डील को जहां सरकार अपनी एक उपलब्धि के तौर पेश कर रही हैं, वहीं विपक्ष और किसान संगठन अमेरिका के दबाव में ट्रेड डील के आरोप के साथ इससे भारतीय किसानों के हितों को सीधे प्रभावित होने का आरोप लगा रहे हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर वेबदुनिया ने देश के पूर्व विदेश और वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा से बातचीत की।
ट्रेड डील पर सरकार की ओर गलत बयानबाजी-पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा,वेबदुनिया से बातचीत में कहते हैं कि ट्रेड डील को लेकर अभी कोई डिटेल्स आए नहीं है। अब डिटेल्स आए हैं तो इस पर विस्तार से कुछ कहा जा सकता है। सरकार की ओर से जो भी कैबिनेट मंत्री या और अन्य लोग जो बयान दे रहे है, उनके उपर हम विश्वास नहीं कर रहे है क्यों वह लोग सब गलतबाजी कर रहे हैं। ट्रेड डील के बारे में सरकार की ओर से यह बताया जा रहा है कि इसमें किसान और डेयरी प्रोडेक्ट नहीं शामिल है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स (X) पर जो पोस्ट की है उसमें कृषि (एग्रीकल्चर) लिखा हुआ है, ऐसे में देश के सामने सहीं तथ्य नहीं आ रहे हैं।
कृषि और डेयरी प्रोडेक्ट पर स्थिति साफ नहीं-वेबदुनिया से बातचीत में पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि अमेरिका की ओर से अब तक जो बयान आए है वह एक तो राष्ट्रपति ट्रंप का ट्वीट (X पोस्ट) हैं और उनके कुछ और पदाधिकारियों ने बात की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ लिखा कि जिन सामानों पर शून्य टैरिफ होगा उसमें कृषि भी शामिल है। इसके साथ अमेरिका की तरफ से साफ कहा गया है कि हमको कृषि में मार्केट एक्सेस मिला हैं,अब सवाल यह है कि कृषि और डेयरी प्रोडेक्ट में भारत ने क्या मार्केट एक्ससेस दिया है, यह स्पष्ट नहीं हैं।
सरकार कह रही हैं कि हमने कृषि और डेयरी सेक्टर को बचाया और अपने सेक्टर को सेफगार्ड किया है। ऐसे में उनकी अंडरस्टैंडिंग में औ हमारी अंडरस्टैंडिग में फर्क हो सकता है, इसलिए उसको देखना जरूरी है कि क्या कृषि और डेयरी प्रोडेक्ट में भारत ने क्या बातें मानी है। अब जब सारे डिटेल्स आएंगे तभी पता चलेगा क्योंकि ट्रेड डील पर भारत सरकार छुपाने की कोशिश करेगी और अमेरिका तथ्यों को सामने रखेगा।
ट्रेड डील से भारत के किसानों को नुकसान- पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि इस ट्रेड डील से भारत के किसानों को नुकसान होगा। अमेरिका के बहुत सारे एग्रीकल्चर प्रोडेक्ट प्रोसेस्ड होते है औऱ वह प्रोसेस्ड होकर दुनिया के अन्य देशों मे भेजे जाते हैं। ऐसे में अमेरिका उसको इंडस्ट्रियल प्रोडेक्ट मानेगा या एग्रीकल्चर प्रोडेक्ट मानेगा। अगर वह इंडस्ट्रियल प्रोडेक्ट है तो उसको हम जीरो प्रोडेक्ट में लेंगे। इसके साथ नट्स वगैरह को जीरो टैरिफ में स्वीकार कर लिया है। अगर अमेरिका के कृषि और डेयरी प्रोडेक्ट चाहे वह खुला हो या डिब्बा बंद हो इसके भारतीय किसानों को नुकसान होगा। अमेरिका में कृषि पर सब्सिडी बहुत अधिक है। भारत में हम उस तरह की सब्सिडी नहीं देते है इसलिए हम उसका मुकाबला नहीं कर सकते।
पीएम मोदी ने ट्रंप को क्यों दिया धन्यवाद?- पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि सवाल यह हैं कि जब डील फाइनल नहीं हुई थी तो हमारे प्रधानमंत्री, ट्रंप को क्यों धन्यवाद दे रहे है। प्रधानमंत्री को यह कहना चाहिए था कि जब डील फाइनल हो जाएगी तब हम इसको देश के सामने रखेंगे। वह तो हुआ नहीं है कि अजीब स्थिति है, कागज में डील साइन नहीं हुई है, डील के डिटेल्स नहीं है और एक पक्ष खुशियां मना रहा है और दूसरा पक्ष यह देखने का प्रयास कर रहा है कि इसके डिटेल्स क्या है। ऐसे में लगता हैं कि भारत ने ट्रेड डील में अमेरिका को ऐसी रियायतें दी है जो कभी नहीं देना चाहिए था और भारत सरकार ट्रेड डील की डिटेल्स छिपाने की कोशिश कर रही हैं।