किसी समय में मध्यप्रदेश को एक डेड स्टेट माना जाता रहा है। यहां से मीडिया को कभी-कभार ही कोई बड़ी खबर हाथ लगती थी। लेकिन अब प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर की वजह से यहां से राष्ट्रीय स्तर की खबरें आ रही हैं। इतना ही नहीं, इंदौर शहर से जिस तरह की खबरें आ रही हैं, लोगों को यहां डर लगने लगा है। जिससे लोगों को इंदौर में डर सा लगने लगा है। अपराध हो, ट्रक और बस हादसे हो, सड़कों पर जाम से हार्टअटैक के मामले हों, किसी अस्पताल में स्वास्थ्य संकट का मामला हो या प्रशासन की लापरवाही की घटनाएं हों, इंदौर से लगातार खौफ में डालने वाली खबरें सामने आ रही हैं। पिछले कुछ समय की ही खबरों पर नजर डालें तो यहां बेहद डराने वाले मामले सामने आए हैं।
इंदौर में सड़क हादसों में, जाम में फंसने से, अस्पताल में गलत इलाज से और दूषित पानी से लगातार मौतें हो रही हैं, अपराध का ग्राफ ऊंचा उठ रहा है सो अलग।
स्वच्छ शहर में दूषित पानी से 17 मौतें : देश का सबसे स्वच्छतम शहर माने जाने वाले इंदौर में हाल में दूषित पानी से 17 मौतें हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग बीमार हो गए। कई अस्पताल में भर्ती हैं। यह सीधेतौर पर स्थानीय पार्षद, नगरीय प्रशासन मंत्री, महापौर और नगर निगम प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। इस कांड से बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं। देश के सबसे स्वच्छ शहर पर दूषित और गंदे पानी के दाग लगे हैं सो अलग। आलम यह है कि कई इलाकों से दूषित और गंदे पानी की शिकायतें मिलने लगी हैं और लोगों को इंदौर का पानी पीने में डर लगने लगा है।
जाम में फंसे 3 मरीजों की हार्ट अटैक से मौत : इंदौर के बिजलपुर के निवासी 65 वर्षीय कमल पांचाल की जाम के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। करीब 1 घंटे तक उनकी कार जाम में फंसी रही, इसी दौरान हार्ट अटैक आया और इसके पहले कि वे अस्पताल पहुंच पाते उनकी मौत हो गई।
ग्राम गारी पिपलिया के 32 साल के युवा
संदीप पिता प्रेम सिंह पटेल को हार्ट अटैक आया तो परिजन उसे लेकर अस्पताल भागे, लेकिन मांगलिया रेलवे क्रॉसिंग पर रोड बंद होने की वजह से अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। दरअसल, मांगलिया रेलवे क्रॉसिंग पर रोड बंद होने के कारण परिजनों ने वैकल्पिक मार्ग सिंगापुर टाउनशिप वाले रास्ते को चुना, लेकिन वहां भी टाउनशिप वाले रास्ते में कई किलोमीटर लंबा जाम लगा था। शुजालपुर के 55 साल के
बलराम पटेल को उनके परिजन इलाज के लिए इंदौर ला रहे थे। कार में दो ऑक्सीजन सिलेंडर थे। एक सिलेंडर देवास पहुंचते हुए खत्म हो गया, जबकि दूसरा सिलेंडर जाम में फंसे होने के कारण खत्म हो गया। दो घंटे तक जाम में फंसे होने के चलते उनका दूसरा सिलेंडर जाम के दौरान ही खत्म हो गया और उनकी सांसें उखड़ गईं।
MY अस्पताल में चूहे काटने से 2 बच्चों की मौत: इंदौर के एमवाय अस्पताल के NICU में चूहों ने नवजात बच्चों के पैरों की उंगलियां कुतर डाली। दो बच्चों को चूहों ने अपना शिकार बना लिया, जिसके बाद दोनों बच्चों की संक्रमण से मौत हो गई। इसके बाद लोग अपना और अपने बच्चों का इलाज प्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कराने से कतराने लगे हैं। वहीं, दिवाली के मौके पर इंदौर में कार्बाइड गन जमकर बिकी। जिसके इस्तेमाल से कई बच्चों की आंखों को क्षति पहुंची। सैकड़ों लोग घायल हुए। कई की आंखें प्रभावित हुईं और कुछ अंधे हो गए।
काल बने बेलगाम ट्रक ने 15 को कुचला, 3 की मौत : शहर के सबसे व्यस्तम क्षेत्र बड़ा गणपति में एक ट्रक मौत का वाहन बनकर आता है और कुछ ही मिनटों में 15 से ज्यादा लोगों रौंद जाता है। इनमें से 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो जाती है। मरने वालों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन प्रशासन ने कबूला तक नहीं। विधायक गोलू शुक्ला की बसों ने दो हादसों में 4-5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसमें एक तो पूरा परिवार ही खत्म हो गया।
सड़क छाप गुंडे कर रहे बेखौफ हत्याएं : शहर में बढ़ते अपराध को लेकर लगातार इंदौर पुलिस और कमिश्नर सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। इंदौर और भोपाल में साल 2021 में इसलिए कमिश्नरी लागू की गई थी कि यहां बढ़ते अपराधों पर लगाम कसी जा सके, लेकिन कमिश्नर प्रणाली में 23 आईपीएस अधिकारी तैनात होने के बाद भी इंदौर में अपराधी बेखौफ हैं। आलम यह है कि छुटभैये गुंडे और नाइट्रावेट का नशा करने वाले नशेडी हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, जिसमें शहर के आम और पढ़े-लिखे नागरिकों की मौतें हो रही हैं।
गुस्सैल गार्ड ने 2 लोगों को गोली मारकर की थी हत्या : पिछले साल इंदौर में खजराना में की हुई दो हत्याओं में पालतू कुत्ते को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें एक गुस्सैल गार्ड ने दो लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी। इसके पहले इंदौर के एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी दीपक सौंधिया को इसलिए चाकू से मार दिया, क्योंकि कार ओवर टेक करने को लेकर विवाद हुआ था। ठीक इसी हफ्ते अतुल जैन को चाकुओं से गोदकर इसलिए मार दिया गया, क्योंकि कार चलाते वक्त मामूली कहा-सुनी हो गई थी।
एक साल में 60 हत्याएं : साल 2025 में इंदौर में 60 से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो हर महीने करीब 6 हत्याएं इंदौर शहर में हो रही हैं। इनके अलावा जो शहर में आए दिन लूट, सायबर फ्रॉड, दुष्कर्म, चोरी और चाकूबाजी आदि अपराध घटते हैं, वो अलग है।
इंदौर से लेकर छिंदवाड़ा तक जहरीला कफ सिरप : छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से कई बच्चों की मौत हो गई। कोल्डरिफ सिरप में जहरीले केमिकल की वजह से 20 से अधिक बच्चों की मौत हुई। जो राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य लापरवाही का बड़ा मामला बना। इसी तरह इंदौर में भी
वेबदुनिया ने अपनी खबरों में खुलासा किया था कि यहां कई बच्चों को प्रतिबंधित कफ सिरप लिखी जा रही हैं।
आस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटर से छेड़छाड़ से इंदौर शर्मसार : आस्ट्रेलिया की दोनों महिला क्रिकेटर कैफे (द नेबरहुड) जा रहीं थी। होटल से करीब 500 मीटर (खजराना रोड) ही पहुंची थी कि सफेद शर्ट और काली कैप लगाए बाइक सवार पीछा करने लगा। उसने तेजी से आकर एक महिला क्रिकेटर को गलत तरीके से छू लिया। दोनों खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़ की शर्मनाक घटना को अंजाम दे डाला। विजय नगर में होटल रेडिसन ब्लू के पास हुई घटना से क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया।
राजा रघुवंशी हत्याकांड ने किया बदनाम : इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान मेघालय में हत्या के आरोप में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित प्रेमी राज और उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया। शादी और रिश्तों जैसी भावनाओं को इस कांड ने बहुत ठेस पहुंचाई। सोनम ने राजा से शादी की। शादी की रस्मों में भाग लिया। उसने किसी को जरा भी अहसास नहीं होने दिया कि उसके मन में राजा की हत्या की साजिश चल रही है। बाद में जिस तरह से हनीमून पर ले जाकर राजा की हत्या को अंजाम दिया, उससे रिश्ते तार- तार हो गए। वहीं रिश्तों के मामले में इंदौर की बदनामी हुई। लोग शादी जैसे बंधनों से पहले जमकर खोजबीन करने के साथ साथ फूंक फूंककर कदम रख रहे हैं और ऐसे मामलों में डरे हुए लगते हैं।
कबड्डी खिलाड़ी को एक्स्पायरी दवा चढाई : इंदौर की रोशनी सिंह लंबे समय से बीमार थहीं। वे कबड्डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से वे निजी अस्पताल में इलाज नहीं करवा पा रही थी। इसलिए उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया था। पति सागर ने बताया कि हमें एमवाय अस्पताल पर भरोसा था कि रोशनी इलाज के बाद ठीक हो जाएगी, लेकिन इसके विपरीत यहां लापरवाही के चलते उसकी जिंदगी और हेल्थ के साथ नर्सिंग स्टॉफ ने खिलवाड़ कर डाला। बता दें कि रोशनी सिंह को एसिटिक फ्लूइड की मात्रा की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। लेकिन उन्हें एक्सपायरी दवाएं लगा दी गईं।