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इंडियन आर्मी के आयरन मैन: ग्रैविटी इंडस्ट्रीज ने दिखाया आसमान में उड़ने वाले 'जेट सूट' का दम, साबित होगा गेम चेंजर

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, सोमवार, 2 फ़रवरी 2026 (14:04 IST)
भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध के तरीकों से आगे बढ़कर 'फ्यूचरिस्टिक' तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में ब्रिटेन की प्रसिद्ध टेक कंपनी Gravity Industries ने भारतीय सेना के सामने अपने अत्याधुनिक 'पेटेंटेड जेट सूट' का सफल प्रदर्शन किया। इस तकनीक ने भारतीय सैनिकों को हॉलीवुड फिल्म 'आयरन मैन' की तरह हवा में उड़ते हुए बाधाओं को पार करते हुए दिखाया, जिसे देख रक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं। आसमान में 'फ्लाइंग सोल्जर' का प्रदर्शन : यह प्रदर्शन आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) में आयोजित किया गया। ग्रैविटी इंडस्ट्रीज के संस्थापक और मुख्य परीक्षण पायलट रिचर्ड ब्राउनिंग ने खुद सूट पहनकर उड़ान भरी।

रूफटॉप ऑपरेशन: प्रदर्शन के दौरान दिखाया गया कि कैसे एक सैनिक बिना किसी सीढ़ी या रस्सियों के, सीधे जमीन से उड़कर ऊंची इमारतों की छतों पर पहुंच सकता है।

दुर्गम इलाकों में मूवमेंट: उन्होंने पहाड़ी रास्तों, नदी और ऊबड़-खाबड़ जमीन के ऊपर से सफलतापूर्वक उड़ान भरकर इसकी व्यवहार्यता (feasibility) साबित की।

तकनीकी ताकत (Specifications) : यह जेट सूट केवल एक गैजेट नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है:

हॉर्सपावर: इसमें लगे 5 टर्बाइन इंजन 1000 एचपी (HP) से अधिक की शक्ति पैदा करते हैं।

रफ्तार: यह हवा में 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ सकता है।

ऊंचाई: यह लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई तक जाने में सक्षम है।

ईंधन: यह जेट ए-1 या सामान्य डीजल पर चल सकता है।

क्‍यों है भारतीय सेना के लिए महत्‍वपूर्ण : भारतीय सेना ने 48 जेट पैक सूट खरीदने के लिए 'फास्ट ट्रैक प्रोसीजर' के तहत प्रक्रिया शुरू की है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

LAC पर निगरानी: चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों पर सैनिकों को तेजी से तैनात करना।

एंटी-टेरर ऑपरेशंस: कश्मीर जैसे क्षेत्रों में शहरी युद्ध के दौरान अचानक छतों पर लैंड करके आतंकवादियों को चौंकाना।

आपदा राहत: भूस्खलन या बाढ़ की स्थिति में उन जगहों पर पहुँच पाना जहाँ हेलीकॉप्टर नहीं जा सकते। हालांकि यह तकनीक बहुत प्रभावशाली है, लेकिन सेना फिलहाल इसके सीमित बैकअप समय (लगभग 8-10 मिनट) और इंजनों के शोर को कम करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है ताकि इसे गुप्त ऑपरेशन्स में इस्तेमाल किया जा सके।

यह प्रदर्शन भारत की 'आधुनिकीकरण' की दिशा में एक बड़ा संकेत है। भारतीय सेना न केवल विदेशी तकनीक देख रही है, बल्कि बेंगलुरु स्थित कुछ स्टार्टअप्स के साथ मिलकर स्वदेशी जेट पैक बनाने पर भी काम कर रही है, ताकि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बल मिले।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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