पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। राज्य में सत्तारूढ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाली संस्था I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी के छापे को लेकर अब आर-पार की सियासी जंग छिड़ गई है। ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने और अहम सबूत ले जाने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED अधिकारियों के खिलाफ दो FIR दर्ज कराने के साथ सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल की है।
आखिर ऐसे क्या कारण हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुलकर I-PAC और उसके फाउंडर प्रतीक जैन के समर्थन में आ गई है। वहीं सवाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ईडी के I-PAC को टारगेट करने को लेकर भी खड़े हो रहे हैं।
2104 से देश के सियासी गलियारों में सबसे विश्वसनीय, कामयाब राजनीतिक सलाहकार कंपनी के तौर पर जानी पहचानी वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के लिए काम कर रही है। I-PAC के को-फाउंडर और झारखंड के रांची के रहने वाले प्रतीक जैन जो वर्तमान में टीएमसी के आईटी सेल के हेड भी है के ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा था और छापे के दौरान ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थी और कार्रवाई का विरोध जताया था।
क्या हैं I-PAC चुनावी विनिंग फॉर्मूला?- I-PAC जो इन दिनों सुर्खियों में है वह राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करती है। आईपैक राजनीतिक दलों के साथ कांट्रेक्ट पर उनके लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम करती है। राजनीतिक सलाहकार कंपनी के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली कंपनी आईपैक (I-PAC) के दिल्ली, कोलकत्ता, हैदराबाद और पटना स्थित अपने दफ्तरों से कामकाज का संचालन करते है। I-PAC करीब 600 प्रोफेशनल की टीम के साथ अपने काम को बाखूबी अंजाम देती है।
सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कमबैक का रोडमैप तैयार करने में माहिर-ऐसे राज्य जहां पार्टी सत्ता में है और I-PAC के कंधों पर चुनाव में एंटी इंकबेंसी फैक्टर को दरकिनार कर पार्टी को फिर सत्ता में वापस लाने की जिम्मेदारी भी होती है. पश्चिम बंगाल में 2022 के विधानसभा चुनाव में I-PAC इस काम में पूरी तरह खरी साबित हुई थी। दअसल पार्टी के सत्ता में रहने पर I-PAC सरकार की नीतियों के निर्माण में भी दखल देती है। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता सरकार का द्वारे सरकार, पाड़ा-पाड़ा समाधान अभियान आईपैक की सलाह पर ही शुरु किया गया था। 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता की जीत के पीछे इन दोनों अभियानों की महत्ती भूमिका रही थी।
वहीं इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की अबार जितबे बंग्ला यात्रा के पीछे भी I-PAC की चुनावी रणनीति है। वहीं बंगाल में महिला वोटर्स को साधने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जो लक्ष्मी भंडार योजना शुरु की है उसके पीछे भी I-PAC की अहम भूमिका है। योजना के तहत महिलाओं को एक हजार से बाहर सौं रुपए सीधे खातों में दिया जाता है। इसके साथ प्रवासी मजदूरों के लिए शुरु की गई श्रमश्री योजना जिसके तहत प्रवासी मजदूरों को 5 हजार रुपए दिए गए, इसके पीछे भी प्रतीक जैन की अहम भूमिका मानी गई। इसके साथ प्रतीक जैन जो टीएमसी के आईटी सेल के हेड भी है वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में नैरेटिव गढ़ने में माहिर है। यहीं कारण है कि 2024 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा पश्चिम बंगाल में कोई कमाल नहीं दिखा पाई।
सीटवार रणनीति का विनिंग फॉर्मूला-राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम करने वाली इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) राजनीतिक पार्टियों के चुनावी कैंपेन को डिजाइन करने के साथ-साथ पार्टी के उम्मीदवारों का ग्राउंड पर कैंपेन करती है। चुनाव के दौरान कंपनी के कर्मचारी उम्मीदवार के अनुसार रणनीति बनाते है। इसके साथ राजनीतिक दलों और पार्टी के उम्मीदवारों की डिजिटल मीडिया ब्रॉन्डिंग का काम भी आईपैक बाखूबी करती है। चुनावी कैंपेन में स्लोगन, कैंपेनिंग सॉन्ग लिखने और गढने का काम भी आईपैक करती है। सोशल मीडिया के इस दौरान कंपनी पार्टी की सोशल मीडिया पर बॉन्डिग का काम भी करती है।
I-PAC का स्ट्राइक रेट बेहतर- 2014 को लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए काम करने वाले I-PAC का स्ट्राइक रेट काफी बेहतर है। I-PAC ने 2015 में बिहार में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के गठबंधन को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 2017 में पंजाब में अमरिंदर सिंह में नेतृत्व में चुनाव लड़ रही कांग्रेस के लिए रणनीति बनाते देखे गए। यहां भी उन्होंने सफलता हासिल की। 2019 में आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस के लिए भी उन्होंन चुनाव में रणनीति तैयार की और जगन को सत्ता की कुर्सी दिलाई। वहीं 2019 के महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ 2020 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ और 2021 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी करवाई।