Publish Date: Tue, 12 May 2026 (09:28 IST)
Updated Date: Wed, 13 May 2026 (12:53 IST)
वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी भारी उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर कोई संकट नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि भारत में तेल या एलपीजी के कोटा (राशनिंग) लागू करने की कोई योजना नहीं है।|
भारत के पास सुरक्षित है पर्याप्त बैकअप
सीआईआई (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि देश के पास ऊर्जा संसाधनों का मजबूत भंडार मौजूद है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि भारत के पास पेट्रोल डीजल का लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है।
रसोई गैस का भी लगभग 45 दिनों का भंडार बना हुआ है। आपूर्ति में किसी भी संभावित बाधा से बचने के लिए भारत ने अपने आयात के स्रोतों में विविधता लाई है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता न रहे।
प्रधानमंत्री की अपील और बढ़ती आशंकाएं
तेल कंपनियों को भारी घाटा, फिर भी कीमतें स्थिर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की लागत में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। लागत और बिक्री मूल्य में अंतर के कारण पेट्रोलियम कंपनियों को प्रतिदिन 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महंगाई से बचाने के लिए सरकार का सुरक्षा कवच
सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के झटके से बचाना है। इसके लिए सरकार ने दो स्तरों पर काम किया है:
आपूर्ति प्रबंधन: अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो हासिल किए गए हैं और पुराने आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाई गई है।
राजकोषीय उपाय: सरकार ने उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती जैसे कदम उठाकर अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बोझ को खुद वहन किया है, ताकि आम आदमी की जेब पर सीधा असर न पड़े।
edited by : Nrapendra Gupta
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