Publish Date: Sat, 04 Apr 2026 (13:14 IST)
Updated Date: Sat, 04 Apr 2026 (15:33 IST)
ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद हार्मुज़ संकट से चीन बहुत डरा हुआ है। पिछले तीन दशकों के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था ने शानदार तरक्की की है, लेकिन यदि खाड़ी देशों से चीन की आपूर्ति लाईन काट दी जाएं तो चीन बर्बाद हो सकता है। यह भी दिलचस्प है की दुनिया में भारत ही वह एकमात्र देश है,जिसके पास वह भौगोलिक और रणनीतिक क्षमता है जो चीन की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकते है। दरअसल चीन की अर्थव्यवस्था खाड़ी देशों पर मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा,व्यापार,निवेश और रणनीतिक भू-राजनीति के कारण निर्भर है। यह निर्भरता चीन के औद्योगिक विकास और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसकी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा सऊदी अरब,इराक और ओमान जैसे खाड़ी देशों से आता है। अपनी मैन्युफैक्चरिंग और परिवहन प्रणाली को चालू रखने के लिए चीन को इस तेल की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता है। खाड़ी देश चीन द्वारा निर्मित वस्तुओं,इलेक्ट्रॉनिक्स,मशीनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा बाजार हैं। ये देश तेल के बदले में चीनी उत्पादों का आयात करते हैं। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड पहल के तहत खाड़ी देशों में बुनियादी ढांचे,बंदरगाहों,रसद और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस पहल के प्रमुख भागीदार है,जो चीन को इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक पैठ बढ़ाने में मदद करते हैं।
चीन का अधिकांश तेल और गैस ईरान,सऊदी अरब,इराक,ओमान और यूएई से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। यह एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से गुजरकर टैंकर हिंद महासागर से होते हुए मलक्का जलडमरूमध्य के रास्ते चीन पहुंचते है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है,वहीं मलक्का जलडमरूमध्य अन्य आपूर्ति के लिए एक अन्य प्रमुख रास्ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जो हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ता है। यह इंडोनेशिया,मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित एक संकीर्ण जलमार्ग है। मलक्का जलडमरूमध्य चीन के लिए ऊर्जा आपूर्ति की सबसे छोटी और कुशल जीवनरेखा है। भारत के पास मलक्का जलडमरूमध्य में चीन की ओर जाने वाले जहाजों को रोकने या उनकी आपूर्ति में भारी व्यवधान डालने की भौगोलिक और रणनीतिक क्षमता है, जिसे अक्सर मलक्का दुविधा कहा जाता है।
भारत हिंद महासागर के केंद्र में स्थित है,जिससे वह पश्चिम एशिया से पूर्व एशिया जाने वाले तेल मार्गों पर निगरानी रख सकता है। चीन इन मार्गों पर बाहरी निर्भरता रखता है। मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से चीन का लगभग सत्तर से अस्सी फीसदी ऊर्जा आयात और बड़ा व्यापार गुजरता है। भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के बेहद करीब स्थित हैं।
भारतीय नौसेना की अंडमान और निकोबार कमान इस क्षेत्र में लगातार गश्त करती है,जो चीन के समुद्री मार्गों पर कड़ी नजर रखती है। युद्ध या संघर्ष की स्थिति में,भारत के पास मलक्का जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने या चीनी जहाजों को रोकने के लिए सी डिनायल या मैरीटाइम इंटरडिक्शन का विकल्प है। यदि भारत इस मार्ग को बंद करता है,तो चीन के लिए ऊर्जा की भारी कमी हो जाएगी। जिससे उसके उद्योग ठप हो सकते हैं और अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी अर्थात् चीन का दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और महाशक्ति बनने का ख्वाब धरा का धरा रह जायेगा। मलक्का को बाधित करने के लिए भारत को क्वाड अर्थात् अमेरिका,जापान या ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों के समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। इसका मतलब साफ है की भारत को यदि चीन पर समन्दर में दबाव बनाएं रखना है तो उसे क्वाड को मजबूत रखना होगा।
मलक्का जलडमरूमध्य का यह संकीर्ण मार्ग भारत के लिए रणनीतिक चोक पॉइंट की तरह है। किसी संकट की स्थिति में भारत इसे प्रभावित कर सकता है, जिससे चीन की आपूर्ति बाधित हो सकती है। भारत की नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय है और उसने अंडमान-निकोबार जैसे सामरिक ठिकानों को विकसित किया है। ये ठिकाने चीन की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं। समुद्री रास्ते वास्तव में वैश्विक शक्ति के सबसे महत्वपूर्ण आधारों में से एक हैं। इतिहास में भी जिसने समुद्रों पर नियंत्रण स्थापित किया,वही आर्थिक और सामरिक रूप से प्रभावशाली बना। औद्योगिक क्रांति के दौर का ब्रिटेन हो या हो या अमेरिका,इन देशों की ताकत समन्दर में उनकी मजबूत स्थिति ही रहे है और अमेरिका ने इसलिए क्वाड को बनाया है।
चीन की ऊर्जा आपूर्ति दो बड़े चोक पॉइंट्स हॉर्मुज़ और मलक्का पर निर्भर है,जो उसकी रणनीतिक असुरक्षा को और बढ़ाते है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भौगोलिक स्थिति मजबूत है। चीन से युद्ध की स्थिति में,भारत की नौसेना मलक्का में चीन के तेल टैंकरों को रोककर चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकती है। जाहिर है चीन से किसी सैन्य संघर्ष की स्थिति में यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य बढ़त का केंद्र बन सकता है। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों के बीच चीन पर हार्मुज़ को लेकर जो दबाव पड़ा है,उससे चीन के खिलाफ भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है,जिसके गहरे सामरिक संकेत है।