Publish Date: Fri, 15 May 2026 (17:04 IST)
Updated Date: Fri, 15 May 2026 (17:07 IST)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में शामिल होने जाते समय दो घंटे के संक्षिप्त दौरे पर United Arab Emirates पहुंचे। इस दौरान भारत और यूएई के बीच पेट्रोलियम, एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण समेत कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच इन समझौतों को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कुछ हद तक यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan की इसी साल जनवरी में हुई छोटी भारत यात्रा जैसी रही। दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढांचा तैयार करने, पेट्रोलियम भंडारण, एलपीजी आपूर्ति और गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने को लेकर समझौते किए गए। इसके अलावा भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, RBL Bank और Samman Capital में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की गई।
भारत को कैसे होगा फायदा?
भारत और यूएई के बीच हुए ये समझौते ऐसे समय में हुए हैं जब देश पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है। यूएई से पेट्रोलियम और एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित होने से भारत को कच्चे तेल की उपलब्धता स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का दबाव कम हो सकता है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण समझौते से भारत आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त तेल भंडार सुरक्षित रख सकेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में देश को राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईंधन आपूर्ति में स्थिरता आएगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
एलपीजी संकट से भी राहत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है और घरेलू जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ था, जिससे भारत की एलपीजी सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा। ऐसे में यूएई के साथ एलपीजी आपूर्ति समझौता भारत के लिए राहतभरा माना जा रहा है।
इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम, कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने का सुझाव दिया था। साथ ही एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की भी अपील की थी।
प्रधानमंत्री की अपील के कुछ ही दिनों बाद शुक्रवार 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। ऐसे में यूएई के साथ हुए ये ऊर्जा समझौते भारत के लिए भविष्य में राहत देने वाले कदम के रूप में देखे जा रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma
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