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China को टक्कर देने की तैयारी, भारत-अमेरिका के कौनसे समझौते से उड़ी ड्रेगन की नींद, दबदबा होगा खत्म

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jaishakar and rubio
भारत और अमेरिका ने  क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने इस समझौते को उन्नत तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा निर्माण के लिए जरूरी खनिजों की भविष्य की आपूर्ति सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। इससे चीन की नींद उड़ गई है। 
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स सेक्टर में चीन के बढ़ते दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरियां, सैन्य उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा ढांचे में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन की मजबूत पकड़ को देखते हुए भारत और अमेरिका ने आपसी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।
 
यह समझौता इस साल की शुरुआत में वॉशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं के बाद सामने आया है, जहां अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 'फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट' (FORGE) पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भरोसेमंद साझेदार देशों के बीच खनिज सुरक्षा को मजबूत करना है।
अमेरिकी दूतावास के बयान के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क का लक्ष्य रणनीतिक खनिजों की सप्लाई और प्रोसेसिंग के लिए भरोसेमंद नेटवर्क तैयार करना और किसी एक देश पर निर्भरता कम करना है। समझौते के तहत दोनों देश फाइनेंसिंग, सप्लाई चेन मजबूती, मिनरल प्रोसेसिंग तकनीक और रेयर अर्थ मैनेजमेंट में साथ काम करेंगे।
 
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस समझौते को भारत-अमेरिका संबंधों की बढ़ती मजबूती का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी मजबूत और विविध सप्लाई चेन तैयार करने में मदद करेगी और क्रिटिकल मिनरल्स व रेयर अर्थ्स के प्रभावी प्रबंधन में सहयोग बढ़ाएगी।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत अब अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, खासकर टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मैंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की अहमियत पर बात की है। आज का यह समझौता उसी सहयोग का ठोस उदाहरण है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में चीन के विकल्प के रूप में भारत-अमेरिका गठजोड़ को और मजबूत कर सकता है। Edited by : Sudhir Sharma

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