India-US ट्रेड डील पर सियासी संग्राम, कांग्रेस का सवाल- 'आत्मनिर्भर भारत या अमेरिका-निर्भर भारत?'
कांग्रेस ने समझौते को लेकर पूछे कई सवाल
Publish Date: Mon, 16 Feb 2026 (18:46 IST)
Updated Date: Mon, 16 Feb 2026 (18:50 IST)
भारत और अमेरिका के बीच हुई अंतरिम ट्रेड डील को लेकर देश की सियासत में भूचाल आ गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साथा है उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने 'सरेंडर' कर दिया है। सुरजेवाला ने पूछा कि देश को जवाब चाहिए कि यह 'आत्मनिर्भर भारत' है या 'अमेरिका-निर्भर भारत'? कांग्रेस का दावा है कि यह समझौता देश के करोड़ों किसानों की रोजी-रोटी को 'तबाह' कर देगा। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यापार समझौते आर्थिक प्रगति के लिए होने चाहिए, न कि देश की संप्रभुता को गिरवी रखने के लिए।
शर्तें बराबरी की होनी चाहिए
सुरजेवाला ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जारी 'पेनल्टी टैरिफ ऑर्डर' का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने स्पष्ट लिखा है कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका इसकी निगरानी करेगा। उन्होंने पूछा कि क्या यह भारत की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ नहीं है? सुरजेवाला ने कहा कि व्यापार समझौते बराबरी की शर्तों पर होने चाहिए। देश के हितों की बलि देकर व्यापार के नाम पर गुलामी की राह नहीं चुनी जा सकती। मोदी सरकार ने ट्रेड डील की आड़ में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है।
तेल खरीदने की मजबूरी क्यों
सुरजेवाला ने कहा कि 2022 से 2026 के बीच रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत ने ₹1.81 लाख करोड़ बचाए, अब अमेरिका से महंगा तेल खरीदने की मजबूरी क्यों? उन्होंने समझौते में भारत की डिजिटल स्वायत्तता और डेटा प्राइवेसी पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार इस डील के जरिए भारत में 'जीएम फसलों' (GM Crops) के लिए पिछले दरवाजे से रास्ता खोल रही है? एनर्जी सिक्योरिटी से खिलवाड़: आरोप है कि ट्रंप के दबाव में भारत ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने का वादा किया है।
किसानों पर पड़ेगा असर
अमेरिका ने बांग्लादेश से एक व्यापार समझौता किया, उसमें साफ-साफ लिखा है कि बांग्लादेश, अमेरिकी कपास व धागा आयात कर जो कपड़ा व वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में 0% शुल्क लगेगा। इसके उलट, हमारे यानी भारत के निर्यात पर 18% शुल्क लगेगा, जबकि भारत कपड़ा व वस्त्र का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसा हुआ तो इसका असर तिरुपुर, सूरत, पानीपत, लुधियाना समेत पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर पड़ेगा। Edited by : Sudhir Sharma