Publish Date: Fri, 27 Feb 2026 (14:29 IST)
Updated Date: Fri, 27 Feb 2026 (14:37 IST)
INS Anjadip Warship : भारतीय नौसेना ने आज हाईटेक फीचर से लैस आईएनएस अंजदीप युद्धपोत (INS Anjadip Warship) को अपने बेड़े में शामिल किया है, जो दुश्मनों पर काल बनकर टूटेगा। खबरों के अनुसार, इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना को नई ताकत मिलेगी। आईएनएस अंजदीप युद्धपोत को शामिल करने का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पनडुब्बीरोधी युद्ध क्षमताओं और तटीय निगरानी को बढ़ाना है। यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना है।
नौसेना को मिलेगी नई ताकत
भारतीय नौसेना ने आज हाईटेक फीचर से लैस आईएनएस अंजदीप युद्धपोत (INS Anjadip Warship) को अपने बेड़े में शामिल किया है, जो दुश्मनों पर काल बनकर टूटेगा। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना को नई ताकत मिलेगी। आईएनएस अंजदीप युद्धपोत को शामिल करने का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पनडुब्बीरोधी युद्ध क्षमताओं और तटीय निगरानी को बढ़ाना है।
'INS अंजदीप' चेन्नई बंदरगाह पर हुआ लांच
यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में चेन्नई बंदरगाह पर इस युद्धपोत को नौसेना में शामिल किया।
पनडुब्बीरोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) भूमिका के अलावा यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है। नौसेना ने कहा कि अंजदीप एक अत्याधुनिक युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से तटीय और राष्ट्र की सुरक्षा के लिहाज से डिजाइन किया गया है। INS अंजदीप को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से बनाया गया है, जिसमें सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ने भाग लिया है।
क्यों रखा 'अंजदीप' नाम
अंजदीप का नाम कर्नाटक के कारवार तट (अरब सागर) के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। वैसे पहले नौसेना में आईएनएस अंजदीप का नाम युद्धपोत था, जिसे 2003 में रिटायर कर दिया था। अब नया जहाज उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
क्यों कहते हैं 'डॉल्फिन हंटर'
यह युद्धपोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है। INS अंजदीप को खासतौर से दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए बनाया गया है। इसी वजह से इसे 'डॉल्फिन हंटर' भी कहा जाता है। इसका मतलब असली डॉल्फिन का शिकार करना नहीं है, बल्कि तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना है।
जानिए 'INS अंजदीप युद्धपोत' की खासियत
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यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के लिए खासतौर पर पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
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इसका मुख्य काम समुद्र के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढना और उन्हें निष्क्रिय करना है।
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यह 8 जहाजों की उस विशेष परियोजना का तीसरा पोत है, जिसे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट परियोजना के तहत तैयार किया गया है
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'अंजदीप' के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति भी और प्रभावशाली बनेगी।
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इसमें हल माउंटेड सोनार 'अभय' लगाया गया है, जो उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद करता है।
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यह पोत लगभग 77 मीटर लंबा है और इसकी अधिकतम गति 25 समुद्री मील तक है।
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इस पोत की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
Edited By : Chetan Gour