Publish Date: Mon, 09 Mar 2026 (12:57 IST)
Updated Date: Mon, 09 Mar 2026 (13:09 IST)
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच छि़ड़े भीषण युद्ध का असर अब भारत पर पड़ने लगा है। इजरायल के ईरान के तेल डिपो पर सीधे प्रहार के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। इजरालय ने ईरान की तेहरान सहित देश के अन्य हिस्सों में स्थित 10 से अधिक बड़ी तेल रिफाइनरों को निशाना बनाया है। अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने जवाब हमले करते हुए खाड़ी इलाके में इजराइली ठिकानों और अमेरिका के सैन्य अड्डे पर हमले किए हैं, जिसमें कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात शामिल हैं। ईरान के पलटवार में इन देशों में स्थित तेल रिफाइनरी पर भी अटैक किए गए है।
तेल उत्पादक इन देशों के युद्ध के जद में आने और बड़ी तेल रिफाइनरी पर अटैक का सीधा असर तेल प्रोडक्शन और उसके एक्सपोर्ट पर पड़ रहा है। जिसका अ्सर है कि ढाई साल के बाद क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचे है। क्रूड ऑयल के दामों में इस तेजी का असर आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। वहीं तेल के परिवहन के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है।
वहीं मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण युद्ध के बाद सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव बना हुआ है, ऐसे में भारत सबसे बेहतर कीमतों की पेशकश करने वाले किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। खाड़ी संकट पर केंद्र सरकार ने कहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है। भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोत 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक किए हैं, जिससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित हुए हैं। गौरतलब है कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात कर रहा है।
वहीं क्रूड ऑयल के दामों में तेजी के बाद अब तक भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है। हलांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कि मानना है कि यदि क्रूड ऑयल इसी तरह महंगा होता गया और खाड़ी युद्ध अगर लंबा खीचा तो भारत में तेल के दामों में बढ़ोत्तरी के साथ पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं भारत में सउदी अरब, कतर और ओमान से क्रूड ऑयल बड़ी मात्रा में आ रहा था। अगर यह युद्ध लंबा खींचा तो तेल की सप्लाई में समस्या आ सकती है। 'वेबदुनिया' से बातचीत में अजय सिंहं कहते है कि अभी तो भारत में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर असर नहीं है और आगे भी नहीं होगा। इसका कारण है कि भारत रूस की तरफ डायवर्ट हो जाएगा और वहां से तेल का आय़ात होता रहेगा।
अजय सिंह कहते है कि युद्ध का असर यूरोपियन देशों पर पड़ेगा और वहां पर तेल संकंट हो सकता है, क्यों यह यूरोपियन देश वेनेजुएला जैसे देशों से तेल आायात कर रहे थे। गौरतलब है कि भारत का 70 फीसदी क्रूड आयात होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दूसरे रास्तों से होता है और दूसरा भारत के लिए राहत वाली बात यह है कि भारत के तेल ट्रेकरों को ईराान की ओर से निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
गैस की बुकिंग नियमों में बदलाव- वहीं युद्ध के लंबा खींचने के अंदेशा और वैश्विक संकट को देखते हुए भारत में गैस सिलिंडर के बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। रसोई गैस सिलेंडर की लॉकिग पीरियड अब 15 दिन की जगह 25 दिन कर दिया है। यानी अब आप एक रसोई गैस सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरा गैस सिलिंडर सिलिंडर 25 दिन के बाद भी बुक कर पाएंगे। अब तक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की एजेंसियों पर अब तक एक सिलिंडर देने के 15 दिन बाद दूसरा सिलिंडर लिया जा सकता था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से रसोई गैस सिलेंडरों की बुकिंग के नए नियम 7 मार्च से लागू हो गए है। मंत्रालय के नए दिशा निर्देशों के तहत अब एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद ही दूसरे सिलेंडर के लिए ऑनलाइन बुकिंग करवाई जा सकेगी। इसके लिए ऑयल कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव किया है और अब 25 दिन से पहले बुकिंग नहीं हो सकेगी। ऑयल कंपनियों ने सभी गैस एजेंसी संचालकों को इन नियमों की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं वैश्विक हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि वे अपनी क्षमता का इस्तेमाल एलपीजी उत्पादन बढ़ाने पर करें। सरकार ने कहा कि प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम्स का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में किया जाए। ये स्ट्रीम्स अब पेट्रोकेमिकल या अन्य उपयोग के बजाय सिर्फ एलपीजी प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होंगी।